10 नवंबर 2026 को बहरमपुर का पंचांग

मंगलवार, 10 नवंबर 2026, बहरमपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को बहरमपुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (14:00 तक), नक्षत्र विशाखा (09:19 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 16:52 पर है। राहुकाल 14:06 से 15:29 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 16:52
रात 05:49 तक
तिथि
प्रतिपदा, 14:00 तक
द्वितीया
नक्षत्र
विशाखा, 09:19 तक
अनुराधा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 नवंबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 14:00 तक
शुक्ल द्वितीया 15:53, 11 नव॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 09:19 तक
अनुराधा 11:38, 11 नव॰ तक
योग
शोभन 03:09, 11 नव॰ तक
अतिगंडअशुभ 03:40, 12 नव॰ तक
करण
बव 14:00 तक
बालव 02:54, 11 नव॰ तक
कौलव 15:53, 11 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
16:52
चंद्रोदय
06:37
चंद्रास्त
17:22
दिनमान
11h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:05 – 04:56
अभिजीत मुहूर्त
10:58 – 11:42

अशुभ समय

राहुकाल
14:06 – 15:29
यमगंड
08:34 – 09:57
गुलिक काल
11:20 – 12:43

10 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:48 – 07:11टालें
उद्वेग07:11 – 08:34टालें
चर08:34 – 09:57सामान्य
लाभ09:57 – 11:20शुभ
अमृत11:20 – 12:43शुभ
काल12:43 – 14:06टालें
शुभ14:06 – 15:29शुभ
रोग15:29 – 16:52टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल16:52 – 18:29टालें
लाभ18:29 – 20:06शुभ
उद्वेग20:06 – 21:44टालें
शुभ21:44 – 23:21शुभ
अमृत23:21 – 00:58शुभ
चर00:58 – 02:35सामान्य
रोग02:35 – 04:12टालें
काल04:12 – 05:49टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:4806:43दिन
सूर्य06:4307:39दिन
शुक्र07:3908:34दिन
बुध08:3409:30दिन
चंद्र09:3010:25दिन
शनि10:2511:20दिन
गुरु11:2012:16दिन
मंगल12:1613:11दिन
सूर्य13:1114:06दिन
शुक्र14:0615:02दिन
बुध15:0215:57दिन
चंद्र15:5716:52दिन
शनि16:5217:57रात
गुरु17:5719:02रात
मंगल19:0220:06रात
सूर्य20:0621:11रात
शुक्र21:1122:16रात
बुध22:1623:21रात
चंद्र23:2100:25रात
शनि00:2501:30रात
गुरु01:3002:35रात
मंगल02:3503:39रात
सूर्य03:3904:44रात
शुक्र04:4405:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
28 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां बहरमपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2322° (लाहिड़ी)। समय बहरमपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।