21 अक्टूबर 2025 को बर्धमान का पंचांग

मंगलवार, 21 अक्टूबर 2025, बर्धमान, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 21 अक्टूबर 2025 को बर्धमान में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (17:55 तक), नक्षत्र चित्रा (22:58 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:38 पर और सूर्यास्त 17:07 पर है। राहुकाल 14:15 से 15:41 तक है।

दिन और रात
दिन 05:38 – 17:07
रात 05:38 तक
तिथि
अमावस्या, 17:55 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
चित्रा, 22:58 तक
स्वाति
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
अमावस्या 17:55 तक
शुक्ल प्रतिपदा 20:17, 22 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 22:58 तक
स्वाति 01:51, 23 अक्टू॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 03:16, 22 अक्टू॰ तक
प्रीति 04:05, 23 अक्टू॰ तक
करण
नाग 17:55 तक
किंस्तुघ्न 07:04, 22 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 09:36 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:38
सूर्यास्त
17:07
चंद्रोदय
05:17
चंद्रास्त
16:51
दिनमान
11h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:58 – 04:48
अभिजीत मुहूर्त
11:00 – 11:46

अशुभ समय

राहुकाल
14:15 – 15:41
यमगंड
08:30 – 09:56
गुलिक काल
11:23 – 12:49

21 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:38 – 07:04टालें
उद्वेग07:04 – 08:30टालें
चर08:30 – 09:56सामान्य
लाभ09:56 – 11:23शुभ
अमृत11:23 – 12:49शुभ
काल12:49 – 14:15टालें
शुभ14:15 – 15:41शुभ
रोग15:41 – 17:07टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:07 – 18:41टालें
लाभ18:41 – 20:15शुभ
उद्वेग20:15 – 21:49टालें
शुभ21:49 – 23:23शुभ
अमृत23:23 – 00:57शुभ
चर00:57 – 02:30सामान्य
रोग02:30 – 04:04टालें
काल04:04 – 05:38टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:3806:35दिन
सूर्य06:3507:33दिन
शुक्र07:3308:30दिन
बुध08:3009:28दिन
चंद्र09:2810:25दिन
शनि10:2511:23दिन
गुरु11:2312:20दिन
मंगल12:2013:18दिन
सूर्य13:1814:15दिन
शुक्र14:1515:12दिन
बुध15:1216:10दिन
चंद्र16:1017:07दिन
शनि17:0718:10रात
गुरु18:1019:13रात
मंगल19:1320:15रात
सूर्य20:1521:18रात
शुक्र21:1822:20रात
बुध22:2023:23रात
चंद्र23:2300:25रात
शनि00:2501:28रात
गुरु01:2802:30रात
मंगल02:3003:33रात
सूर्य03:3304:36रात
शुक्र04:3605:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
8 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां बर्धमान में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2175° (लाहिड़ी)। समय बर्धमान (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।