19 नवंबर 2025 को बरेली का पंचांग

बुधवार, 19 नवंबर 2025, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 19 नवंबर 2025 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (09:44 तक), नक्षत्र स्वाति (07:59 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 17:17 पर है। राहुकाल 11:57 से 13:17 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 17:17
रात 06:38 तक
तिथि
अमावस्या
नक्षत्र
विशाखा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 नवंबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 09:44 तक
अमावस्या 12:17, 20 नव॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 07:59 तक
विशाखा 10:58, 20 नव॰ तक
योग
सौभाग्य 09:00 तक
शोभन 09:52, 20 नव॰ तक
करण
शकुनि 09:44 तक
चतुष्पद 23:00 तक
नाग 12:17, 20 नव॰ तक
चंद्र राशि
तुला 04:14, 20 नव॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
17:17
चंद्रोदय
05:41
चंद्रास्त
16:26
दिनमान
10h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:50 – 05:44
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:18 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:57 – 13:17
यमगंड
07:57 – 09:17
गुलिक काल
10:37 – 11:57

19 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:37 – 07:57शुभ
अमृत07:57 – 09:17शुभ
काल09:17 – 10:37टालें
शुभ10:37 – 11:57शुभ
रोग11:57 – 13:17टालें
उद्वेग13:17 – 14:37टालें
चर14:37 – 15:57सामान्य
लाभ15:57 – 17:17शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:17 – 18:57टालें
शुभ18:57 – 20:37शुभ
अमृत20:37 – 22:17शुभ
चर22:17 – 23:57सामान्य
रोग23:57 – 01:38टालें
काल01:38 – 03:18टालें
लाभ03:18 – 04:58शुभ
उद्वेग04:58 – 06:38टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3707:30दिन
चंद्र07:3008:24दिन
शनि08:2409:17दिन
गुरु09:1710:10दिन
मंगल10:1011:04दिन
सूर्य11:0411:57दिन
शुक्र11:5712:50दिन
बुध12:5013:44दिन
चंद्र13:4414:37दिन
शनि14:3715:30दिन
गुरु15:3016:24दिन
मंगल16:2417:17दिन
सूर्य17:1718:24रात
शुक्र18:2419:30रात
बुध19:3020:37रात
चंद्र20:3721:44रात
शनि21:4422:51रात
गुरु22:5123:57रात
मंगल23:5701:04रात
सूर्य01:0402:11रात
शुक्र02:1103:18रात
बुध03:1804:24रात
चंद्र04:2405:31रात
शनि05:3106:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 दिस॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 दिस॰ 2025धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2186° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।