29 दिसंबर 2025 को बरेली का पंचांग

सोमवार, 29 दिसंबर 2025, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 29 दिसंबर 2025 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (10:12 तक), नक्षत्र रेवती (07:41 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 07:03 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 08:21 से 09:38 तक है।

दिन और रात
दिन 07:03 – 17:25
रात 07:03 तक
तिथि
नवमी, 10:12 तक
दशमी
नक्षत्र
अश्विनी, 06:04 तक
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल नवमी 10:12 तक
शुक्ल दशमी 07:51, 30 दिस॰ तक
नक्षत्र
रेवती 07:41 तक
अश्विनी 06:04, 30 दिस॰ तक
भरणी 03:58, 31 दिस॰ तक
योग
परिघअशुभ 07:36 तक
शिव 04:31, 30 दिस॰ तक
सिद्ध 01:02, 31 दिस॰ तक
करण
कौलव 10:12 तक
तैतिल 21:06 तक
गर 07:51, 30 दिस॰ तक
चंद्र राशि
मीन 07:41 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:03
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
12:45
चंद्रास्त
01:16
दिनमान
10h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:14 – 06:08
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:35

अशुभ समय

राहुकाल
08:21 – 09:38
यमगंड
10:56 – 12:14
गुलिक काल
13:32 – 14:49

29 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:03 – 08:21शुभ
काल08:21 – 09:38टालें
शुभ09:38 – 10:56शुभ
रोग10:56 – 12:14टालें
उद्वेग12:14 – 13:32टालें
चर13:32 – 14:49सामान्य
लाभ14:49 – 16:07शुभ
अमृत16:07 – 17:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:25 – 19:07सामान्य
रोग19:07 – 20:49टालें
काल20:49 – 22:32टालें
लाभ22:32 – 00:14शुभ
उद्वेग00:14 – 01:56टालें
शुभ01:56 – 03:39शुभ
अमृत03:39 – 05:21शुभ
चर05:21 – 07:03सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:0307:55दिन
शनि07:5508:47दिन
गुरु08:4709:38दिन
मंगल09:3810:30दिन
सूर्य10:3011:22दिन
शुक्र11:2212:14दिन
बुध12:1413:06दिन
चंद्र13:0613:57दिन
शनि13:5714:49दिन
गुरु14:4915:41दिन
मंगल15:4116:33दिन
सूर्य16:3317:25दिन
शुक्र17:2518:33रात
बुध18:3319:41रात
चंद्र19:4120:49रात
शनि20:4921:58रात
गुरु21:5823:06रात
मंगल23:0600:14रात
सूर्य00:1401:22रात
शुक्र01:2202:30रात
बुध02:3003:39रात
चंद्र03:3904:47रात
शनि04:4705:55रात
गुरु05:5507:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा
6 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 जन॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2202° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।