11 फ़रवरी 2026 को बरेली का पंचांग

बुधवार, 11 फ़रवरी 2026, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 11 फ़रवरी 2026 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (09:59 तक), नक्षत्र अनुराधा (10:52 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:53 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 12:26 से 13:49 तक है।

दिन और रात
दिन 06:53 – 17:59
रात 06:52 तक
तिथि
नवमी, 09:59 तक
दशमी
नक्षत्र
अनुराधा, 10:52 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 फ़रवरी 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण नवमी 09:59 तक
कृष्ण दशमी 12:22, 12 फ़र॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 13:42, 12 फ़र॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 02:29, 12 फ़र॰ तक
हर्षण 03:05, 13 फ़र॰ तक
करण
गर 09:59 तक
वणिज 23:12 तक
विष्टि (भद्रा) 12:22, 12 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:53
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
02:06
चंद्रास्त
12:18
दिनमान
11h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:10 – 06:01
अभिजीत मुहूर्त
12:04 – 12:48 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:26 – 13:49
यमगंड
08:16 – 09:40
गुलिक काल
11:03 – 12:26

11 फ़रवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:53 – 08:16शुभ
अमृत08:16 – 09:40शुभ
काल09:40 – 11:03टालें
शुभ11:03 – 12:26शुभ
रोग12:26 – 13:49टालें
उद्वेग13:49 – 15:13टालें
चर15:13 – 16:36सामान्य
लाभ16:36 – 17:59शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:59 – 19:36टालें
शुभ19:36 – 21:12शुभ
अमृत21:12 – 22:49शुभ
चर22:49 – 00:26सामान्य
रोग00:26 – 02:02टालें
काल02:02 – 03:39टालें
लाभ03:39 – 05:16शुभ
उद्वेग05:16 – 06:52टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:5307:49दिन
चंद्र07:4908:44दिन
शनि08:4409:40दिन
गुरु09:4010:35दिन
मंगल10:3511:31दिन
सूर्य11:3112:26दिन
शुक्र12:2613:22दिन
बुध13:2214:17दिन
चंद्र14:1715:13दिन
शनि15:1316:08दिन
गुरु16:0817:04दिन
मंगल17:0417:59दिन
सूर्य17:5919:04रात
शुक्र19:0420:08रात
बुध20:0821:12रात
चंद्र21:1222:17रात
शनि22:1723:21रात
गुरु23:2100:26रात
मंगल00:2601:30रात
सूर्य01:3002:35रात
शुक्र02:3503:39रात
बुध03:3904:43रात
चंद्र04:4305:48रात
शनि05:4806:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 फ़र॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 मार्च 2026फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
7 मार्च 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 मार्च 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2218° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।