5 सितंबर 2027 को बरेली का पंचांग

रविवार, 5 सितंबर 2027, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 5 सितंबर 2027 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (11:17 तक), नक्षत्र स्वाति (14:30 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:52 पर और सूर्यास्त 18:29 पर है। राहुकाल 16:54 से 18:29 तक है।

दिन और रात
दिन 05:52 – 18:29
रात 05:52 तक
तिथि
पंचमी, 11:17 तक
षष्ठी
नक्षत्र
स्वाति, 14:30 तक
विशाखा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 सितंबर 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 11:17 तक
शुक्ल षष्ठी 10:58, 6 सित॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 14:30 तक
विशाखा 14:59, 6 सित॰ तक
योग
ब्रह्म 06:06 तक
इंद्र 04:37, 6 सित॰ तक
वैधृतिअशुभ 03:48, 7 सित॰ तक
करण
बालव 11:17 तक
कौलव 23:01 तक
तैतिल 10:58, 6 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:52
सूर्यास्त
18:29
चंद्रोदय
10:34
चंद्रास्त
21:18
दिनमान
12h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 05:06
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
16:54 – 18:29
यमगंड
12:10 – 13:45
गुलिक काल
15:20 – 16:54

5 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:52 – 07:26टालें
चर07:26 – 09:01सामान्य
लाभ09:01 – 10:36शुभ
अमृत10:36 – 12:10शुभ
काल12:10 – 13:45टालें
शुभ13:45 – 15:20शुभ
रोग15:20 – 16:54टालें
उद्वेग16:54 – 18:29टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:29 – 19:54शुभ
अमृत19:54 – 21:20शुभ
चर21:20 – 22:45सामान्य
रोग22:45 – 00:11टालें
काल00:11 – 01:36टालें
लाभ01:36 – 03:01शुभ
उद्वेग03:01 – 04:27टालें
शुभ04:27 – 05:52शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5206:55दिन
शुक्र06:5507:58दिन
बुध07:5809:01दिन
चंद्र09:0110:04दिन
शनि10:0411:07दिन
गुरु11:0712:10दिन
मंगल12:1013:14दिन
सूर्य13:1414:17दिन
शुक्र14:1715:20दिन
बुध15:2016:23दिन
चंद्र16:2317:26दिन
शनि17:2618:29दिन
गुरु18:2919:26रात
मंगल19:2620:23रात
सूर्य20:2321:20रात
शुक्र21:2022:17रात
बुध22:1723:14रात
चंद्र23:1400:11रात
शनि00:1101:08रात
गुरु01:0802:05रात
मंगल02:0503:01रात
सूर्य03:0103:58रात
शुक्र03:5804:55रात
बुध04:5505:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 सित॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 सित॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2027कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2437° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।