23 मार्च 2028 को बरेली का पंचांग

गुरुवार, 23 मार्च 2028, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 23 मार्च 2028 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (05:34, 24 मार्च तक), नक्षत्र धनिष्ठा (11:22 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:12 पर और सूर्यास्त 18:25 पर है। राहुकाल 13:50 से 15:22 तक है।

दिन और रात
दिन 06:12 – 18:25
रात 06:11 तक
तिथि
त्रयोदशी, 05:34 तक
नक्षत्र
धनिष्ठा, 11:22 तक
शतभिषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 मार्च 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 05:34, 24 मार्च तक
कृष्ण चतुर्दशी 07:57, 25 मार्च तक
नक्षत्र
शतभिषा 14:24, 24 मार्च तक
योग
साध्य 01:59, 24 मार्च तक
शुभ 02:49, 25 मार्च तक
करण
गर 16:16 तक
वणिज 05:34, 24 मार्च तक
विष्टि (भद्रा) 18:47, 24 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:12
सूर्यास्त
18:25
चंद्रोदय
04:26
चंद्रास्त
16:05
दिनमान
12h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:38 – 05:25
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
13:50 – 15:22
यमगंड
06:12 – 07:44
गुलिक काल
09:15 – 10:47

23 मार्च 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:12 – 07:44शुभ
रोग07:44 – 09:15टालें
उद्वेग09:15 – 10:47टालें
चर10:47 – 12:18सामान्य
लाभ12:18 – 13:50शुभ
अमृत13:50 – 15:22शुभ
काल15:22 – 16:53टालें
शुभ16:53 – 18:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:25 – 19:53शुभ
चर19:53 – 21:21सामान्य
रोग21:21 – 22:50टालें
काल22:50 – 00:18टालें
लाभ00:18 – 01:46शुभ
उद्वेग01:46 – 03:14टालें
शुभ03:14 – 04:43शुभ
अमृत04:43 – 06:11शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:1207:13दिन
मंगल07:1308:14दिन
सूर्य08:1409:15दिन
शुक्र09:1510:16दिन
बुध10:1611:17दिन
चंद्र11:1712:18दिन
शनि12:1813:20दिन
गुरु13:2014:21दिन
मंगल14:2115:22दिन
सूर्य15:2216:23दिन
शुक्र16:2317:24दिन
बुध17:2418:25दिन
चंद्र18:2519:24रात
शनि19:2420:23रात
गुरु20:2321:21रात
मंगल21:2122:20रात
सूर्य22:2023:19रात
शुक्र23:1900:18रात
बुध00:1801:17रात
चंद्र01:1702:16रात
शनि02:1603:14रात
गुरु03:1404:13रात
मंगल04:1305:12रात
सूर्य05:1206:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 मार्च 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 मार्च 2028चैत्र अमावस्याअमावस्या
30 मार्च 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अप्रैल 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अप्रैल 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अप्रैल 2028चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
13 अप्रैल 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अप्रैल 2028मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 अप्रैल 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2513° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।