9 अक्टूबर 2028 को बरेली का पंचांग

सोमवार, 9 अक्टूबर 2028, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 9 अक्टूबर 2028 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (06:02, 10 अक्टू॰ तक), नक्षत्र रोहिणी (08:16 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:09 पर और सूर्यास्त 17:48 पर है। राहुकाल 07:36 से 09:04 तक है।

दिन और रात
दिन 06:09 – 17:48
रात 06:10 तक
तिथि
षष्ठी, 06:02 तक
नक्षत्र
मृगशिरा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 06:02, 10 अक्टू॰ तक
कृष्ण सप्तमी 05:48, 11 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 08:16 तक
मृगशिरा 09:10, 10 अक्टू॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 10:28 तक
वरीयान 09:34, 10 अक्टू॰ तक
करण
गर 17:56 तक
वणिज 06:02, 10 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 18:00, 10 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 20:47 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:09
सूर्यास्त
17:48
चंद्रोदय
21:34
चंद्रास्त
11:09
दिनमान
11h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:20
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
07:36 – 09:04
यमगंड
10:31 – 11:59
गुलिक काल
13:26 – 14:54

9 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:09 – 07:36शुभ
काल07:36 – 09:04टालें
शुभ09:04 – 10:31शुभ
रोग10:31 – 11:59टालें
उद्वेग11:59 – 13:26टालें
चर13:26 – 14:54सामान्य
लाभ14:54 – 16:21शुभ
अमृत16:21 – 17:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:48 – 19:21सामान्य
रोग19:21 – 20:54टालें
काल20:54 – 22:26टालें
लाभ22:26 – 23:59शुभ
उद्वेग23:59 – 01:32टालें
शुभ01:32 – 03:04शुभ
अमृत03:04 – 04:37शुभ
चर04:37 – 06:10सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:0907:07दिन
शनि07:0708:06दिन
गुरु08:0609:04दिन
मंगल09:0410:02दिन
सूर्य10:0211:00दिन
शुक्र11:0011:59दिन
बुध11:5912:57दिन
चंद्र12:5713:55दिन
शनि13:5514:54दिन
गुरु14:5415:52दिन
मंगल15:5216:50दिन
सूर्य16:5017:48दिन
शुक्र17:4818:50रात
बुध18:5019:52रात
चंद्र19:5220:54रात
शनि20:5421:55रात
गुरु21:5522:57रात
मंगल22:5723:59रात
सूर्य23:5901:01रात
शुक्र01:0102:03रात
बुध02:0303:04रात
चंद्र03:0404:06रात
शनि04:0605:08रात
गुरु05:0806:10रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अक्टू॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अक्टू॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2028तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2028कार्तिक अमावस्याअमावस्या
21 अक्टू॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2590° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।