29 अप्रैल 2029 को बरेली का पंचांग

रविवार, 29 अप्रैल 2029, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 29 अप्रैल 2029 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (12:28 तक), नक्षत्र विशाखा (22:40 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:33 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 17:06 से 18:45 तक है।

दिन और रात
दिन 05:33 – 18:45
रात 05:32 तक
तिथि
प्रतिपदा, 12:28 तक
द्वितीया
नक्षत्र
विशाखा, 22:40 तक
अनुराधा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 अप्रैल 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 12:28 तक
कृष्ण द्वितीया 09:12, 30 अप्रैल तक
नक्षत्र
विशाखा 22:40 तक
अनुराधा 20:26, 30 अप्रैल तक
योग
व्यतीपातअशुभ 19:33 तक
वरीयान 15:53, 30 अप्रैल तक
करण
कौलव 12:28 तक
तैतिल 22:47 तक
गर 09:12, 30 अप्रैल तक
चंद्र राशि
तुला 17:18 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:33
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
20:04
चंद्रास्त
05:49
दिनमान
13h 12m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 04:50
अभिजीत मुहूर्त
11:43 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
17:06 – 18:45
यमगंड
12:09 – 13:48
गुलिक काल
15:27 – 17:06

29 अप्रैल 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:33 – 07:12टालें
चर07:12 – 08:51सामान्य
लाभ08:51 – 10:30शुभ
अमृत10:30 – 12:09शुभ
काल12:09 – 13:48टालें
शुभ13:48 – 15:27शुभ
रोग15:27 – 17:06टालें
उद्वेग17:06 – 18:45टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:45 – 20:06शुभ
अमृत20:06 – 21:27शुभ
चर21:27 – 22:48सामान्य
रोग22:48 – 00:09टालें
काल00:09 – 01:30टालें
लाभ01:30 – 02:51शुभ
उद्वेग02:51 – 04:11टालें
शुभ04:11 – 05:32शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3306:39दिन
शुक्र06:3907:45दिन
बुध07:4508:51दिन
चंद्र08:5109:57दिन
शनि09:5711:03दिन
गुरु11:0312:09दिन
मंगल12:0913:15दिन
सूर्य13:1514:21दिन
शुक्र14:2115:27दिन
बुध15:2716:33दिन
चंद्र16:3317:39दिन
शनि17:3918:45दिन
गुरु18:4519:39रात
मंगल19:3920:33रात
सूर्य20:3321:27रात
शुक्र21:2722:21रात
बुध22:2123:15रात
चंद्र23:1500:09रात
शनि00:0901:03रात
गुरु01:0301:57रात
मंगल01:5702:51रात
सूर्य02:5103:44रात
शुक्र03:4404:38रात
बुध04:3805:32रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 मई 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 मई 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 मई 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 मई 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 मई 2029वैशाख अमावस्याअमावस्या
15 मई 2029वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मई 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
24 मई 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 मई 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
27 मई 2029वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2667° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।