3 दिसंबर 2029 को बरेली का पंचांग

सोमवार, 3 दिसंबर 2029, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 3 दिसंबर 2029 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (03:16, 4 दिस॰ तक), नक्षत्र स्वाति (21:18 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:48 पर और सूर्यास्त 17:15 पर है। राहुकाल 08:06 से 09:25 तक है।

दिन और रात
दिन 06:48 – 17:15
रात 06:49 तक
तिथि
त्रयोदशी, 03:16 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
स्वाति, 21:18 तक
विशाखा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 दिसंबर 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 03:16, 4 दिस॰ तक
कृष्ण चतुर्दशी 23:47, 4 दिस॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 21:18 तक
विशाखा 18:34, 4 दिस॰ तक
योग
शोभन 20:05 तक
अतिगंडअशुभ 15:59, 4 दिस॰ तक
करण
गर 17:00 तक
वणिज 03:16, 4 दिस॰ तक
विष्टि (भद्रा) 13:31, 4 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:48
सूर्यास्त
17:15
चंद्रोदय
04:01
चंद्रास्त
15:06
दिनमान
10h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:00 – 05:54
अभिजीत मुहूर्त
11:41 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
08:06 – 09:25
यमगंड
10:43 – 12:01
गुलिक काल
13:20 – 14:38

3 दिसंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:48 – 08:06शुभ
काल08:06 – 09:25टालें
शुभ09:25 – 10:43शुभ
रोग10:43 – 12:01टालें
उद्वेग12:01 – 13:20टालें
चर13:20 – 14:38सामान्य
लाभ14:38 – 15:57शुभ
अमृत15:57 – 17:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:15 – 18:57सामान्य
रोग18:57 – 20:38टालें
काल20:38 – 22:20टालें
लाभ22:20 – 00:02शुभ
उद्वेग00:02 – 01:44टालें
शुभ01:44 – 03:25शुभ
अमृत03:25 – 05:07शुभ
चर05:07 – 06:49सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4807:40दिन
शनि07:4008:32दिन
गुरु08:3209:25दिन
मंगल09:2510:17दिन
सूर्य10:1711:09दिन
शुक्र11:0912:01दिन
बुध12:0112:54दिन
चंद्र12:5413:46दिन
शनि13:4614:38दिन
गुरु14:3815:31दिन
मंगल15:3116:23दिन
सूर्य16:2317:15दिन
शुक्र17:1518:23रात
बुध18:2319:31रात
चंद्र19:3120:38रात
शनि20:3821:46रात
गुरु21:4622:54रात
मंगल22:5400:02रात
सूर्य00:0201:10रात
शुक्र01:1002:17रात
बुध02:1703:25रात
चंद्र03:2504:33रात
शनि04:3305:41रात
गुरु05:4106:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2029धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
24 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 दिस॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2750° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।