10 जुलाई 2025 को बेंगलुरु का पंचांग

गुरुवार, 10 जुलाई 2025, बेंगलुरु, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 10 जुलाई 2025 को बेंगलुरु में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (02:06, 11 जुल॰ तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (05:56, 11 जुल॰ तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 05:59 पर और सूर्यास्त 18:50 पर है। राहुकाल 14:01 से 15:37 तक है।

दिन और रात
दिन 05:59 – 18:50
रात 05:59 तक
तिथि
पूर्णिमा, 02:06 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 05:56 तक
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 जुलाई 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
पूर्णिमा 02:06, 11 जुल॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 02:09, 12 जुल॰ तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 05:56, 11 जुल॰ तक
उत्तराषाढ़ा 06:36, 12 जुल॰ तक
योग
इंद्र 21:37 तक
वैधृतिअशुभ 20:44, 11 जुल॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:55 तक
बव 02:06, 11 जुल॰ तक
बालव 14:11, 11 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:59
सूर्यास्त
18:50
चंद्रोदय
18:39
चंद्रास्त
05:13
दिनमान
12h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:50

अशुभ समय

राहुकाल
14:01 – 15:37
यमगंड
05:59 – 07:36
गुलिक काल
09:12 – 10:48

10 जुलाई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:59 – 07:36शुभ
रोग07:36 – 09:12टालें
उद्वेग09:12 – 10:48टालें
चर10:48 – 12:24सामान्य
लाभ12:24 – 14:01शुभ
अमृत14:01 – 15:37शुभ
काल15:37 – 17:13टालें
शुभ17:13 – 18:50शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:50 – 20:13शुभ
चर20:13 – 21:37सामान्य
रोग21:37 – 23:01टालें
काल23:01 – 00:25टालें
लाभ00:25 – 01:48शुभ
उद्वेग01:48 – 03:12टालें
शुभ03:12 – 04:36शुभ
अमृत04:36 – 05:59शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5907:03दिन
मंगल07:0308:08दिन
सूर्य08:0809:12दिन
शुक्र09:1210:16दिन
बुध10:1611:20दिन
चंद्र11:2012:24दिन
शनि12:2413:29दिन
गुरु13:2914:33दिन
मंगल14:3315:37दिन
सूर्य15:3716:41दिन
शुक्र16:4117:46दिन
बुध17:4618:50दिन
चंद्र18:5019:46रात
शनि19:4620:41रात
गुरु20:4121:37रात
मंगल21:3722:33रात
सूर्य22:3323:29रात
शुक्र23:2900:25रात
बुध00:2501:20रात
चंद्र01:2002:16रात
शनि02:1603:12रात
गुरु03:1204:08रात
मंगल04:0805:04रात
सूर्य05:0405:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 जुल॰ 2025आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
14 जुल॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 जुल॰ 2025कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जुल॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 जुल॰ 2025श्रावण अमावस्याअमावस्या
28 जुल॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अग॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां बेंगलुरु में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2136° (लाहिड़ी)। समय बेंगलुरु (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।