25 अगस्त 2025 को बेंगलुरु का पंचांग

सोमवार, 25 अगस्त 2025, बेंगलुरु, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 25 अगस्त 2025 को बेंगलुरु में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (12:35 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (03:49, 26 अग॰ तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:08 पर और सूर्यास्त 18:34 पर है। राहुकाल 07:41 से 09:14 तक है।

दिन और रात
दिन 06:08 – 18:34
रात 06:08 तक
तिथि
द्वितीया, 12:35 तक
तृतीया
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 03:49 तक
हस्त
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 अगस्त 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 12:35 तक
शुक्ल तृतीया 13:55, 26 अग॰ तक
नक्षत्र
हस्त 06:04, 27 अग॰ तक
योग
सिद्ध 12:06 तक
साध्य 12:08, 26 अग॰ तक
करण
कौलव 12:35 तक
तैतिल 01:11, 26 अग॰ तक
गर 13:55, 26 अग॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 08:28 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:08
सूर्यास्त
18:34
चंद्रोदय
07:40
चंद्रास्त
20:00
दिनमान
12h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:35 – 05:22
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:46

अशुभ समय

राहुकाल
07:41 – 09:14
यमगंड
10:48 – 12:21
गुलिक काल
13:54 – 15:28

25 अगस्त 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:08 – 07:41शुभ
काल07:41 – 09:14टालें
शुभ09:14 – 10:48शुभ
रोग10:48 – 12:21टालें
उद्वेग12:21 – 13:54टालें
चर13:54 – 15:28सामान्य
लाभ15:28 – 17:01शुभ
अमृत17:01 – 18:34शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:34 – 20:01सामान्य
रोग20:01 – 21:28टालें
काल21:28 – 22:54टालें
लाभ22:54 – 00:21शुभ
उद्वेग00:21 – 01:48टालें
शुभ01:48 – 03:15शुभ
अमृत03:15 – 04:41शुभ
चर04:41 – 06:08सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:0807:10दिन
शनि07:1008:12दिन
गुरु08:1209:14दिन
मंगल09:1410:17दिन
सूर्य10:1711:19दिन
शुक्र11:1912:21दिन
बुध12:2113:23दिन
चंद्र13:2314:26दिन
शनि14:2615:28दिन
गुरु15:2816:30दिन
मंगल16:3017:32दिन
सूर्य17:3218:34दिन
शुक्र18:3419:32रात
बुध19:3220:30रात
चंद्र20:3021:28रात
शनि21:2822:26रात
गुरु22:2623:23रात
मंगल23:2300:21रात
सूर्य00:2101:19रात
शुक्र01:1902:17रात
बुध02:1703:15रात
चंद्र03:1504:12रात
शनि04:1205:10रात
गुरु05:1006:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 अग॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 सित॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या

तिथियां बेंगलुरु में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2153° (लाहिड़ी)। समय बेंगलुरु (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।