25 जुलाई 2027 को बेंगलुरु का पंचांग

रविवार, 25 जुलाई 2027, बेंगलुरु, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 25 जुलाई 2027 को बेंगलुरु में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (09:53 तक), नक्षत्र रेवती (05:14, 26 जुल॰ तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 06:03 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 17:13 से 18:48 तक है।

दिन और रात
दिन 06:03 – 18:48
रात 06:03 तक
तिथि
षष्ठी, 09:53 तक
सप्तमी
नक्षत्र
रेवती, 05:14 तक
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 जुलाई 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 09:53 तक
कृष्ण सप्तमी 10:25, 26 जुल॰ तक
नक्षत्र
रेवती 05:14, 26 जुल॰ तक
अश्विनी 05:53, 27 जुल॰ तक
योग
सुकर्मा 20:03 तक
धृति 19:16, 26 जुल॰ तक
करण
वणिज 09:53 तक
विष्टि (भद्रा) 22:14 तक
बव 10:25, 26 जुल॰ तक
चंद्र राशि
मीन 05:14, 26 जुल॰ तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:03
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
23:05
चंद्रास्त
11:04
दिनमान
12h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:33 – 05:18
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
17:13 – 18:48
यमगंड
12:26 – 14:01
गुलिक काल
15:37 – 17:13

25 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:03 – 07:39टालें
चर07:39 – 09:14सामान्य
लाभ09:14 – 10:50शुभ
अमृत10:50 – 12:26शुभ
काल12:26 – 14:01टालें
शुभ14:01 – 15:37शुभ
रोग15:37 – 17:13टालें
उद्वेग17:13 – 18:48टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:48 – 20:13शुभ
अमृत20:13 – 21:37शुभ
चर21:37 – 23:01सामान्य
रोग23:01 – 00:26टालें
काल00:26 – 01:50टालें
लाभ01:50 – 03:15शुभ
उद्वेग03:15 – 04:39टालें
शुभ04:39 – 06:03शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0307:07दिन
शुक्र07:0708:11दिन
बुध08:1109:14दिन
चंद्र09:1410:18दिन
शनि10:1811:22दिन
गुरु11:2212:26दिन
मंगल12:2613:29दिन
सूर्य13:2914:33दिन
शुक्र14:3315:37दिन
बुध15:3716:41दिन
चंद्र16:4117:44दिन
शनि17:4418:48दिन
गुरु18:4819:44रात
मंगल19:4420:41रात
सूर्य20:4121:37रात
शुक्र21:3722:33रात
बुध22:3323:29रात
चंद्र23:2900:26रात
शनि00:2601:22रात
गुरु01:2202:18रात
मंगल02:1803:15रात
सूर्य03:1504:11रात
शुक्र04:1105:07रात
बुध05:0706:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अग॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अग॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अग॰ 2027श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
17 अग॰ 2027सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां बेंगलुरु में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2421° (लाहिड़ी)। समय बेंगलुरु (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।