27 जून 2029 को बेंगलुरु का पंचांग

बुधवार, 27 जून 2029, बेंगलुरु, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 27 जून 2029 को बेंगलुरु में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (07:16 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (12:56 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 18:49 पर है। राहुकाल 12:22 से 13:59 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 18:49
रात 05:56 तक
तिथि
द्वितीया
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 12:56 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 जून 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 07:16 तक
कृष्ण द्वितीया 06:12, 28 जून तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 12:46, 28 जून तक
योग
इंद्र 02:46, 28 जून तक
वैधृतिअशुभ 01:20, 29 जून तक
करण
कौलव 07:16 तक
तैतिल 18:40 तक
गर 06:12, 28 जून तक
चंद्र राशि
धनु 18:50 तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
18:49
चंद्रोदय
20:00
चंद्रास्त
06:51
दिनमान
12h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:27 – 05:11
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:48 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:22 – 13:59
यमगंड
07:32 – 09:09
गुलिक काल
10:46 – 12:22

27 जून 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:56 – 07:32शुभ
अमृत07:32 – 09:09शुभ
काल09:09 – 10:46टालें
शुभ10:46 – 12:22शुभ
रोग12:22 – 13:59टालें
उद्वेग13:59 – 15:35टालें
चर15:35 – 17:12सामान्य
लाभ17:12 – 18:49शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:49 – 20:12टालें
शुभ20:12 – 21:36शुभ
अमृत21:36 – 22:59शुभ
चर22:59 – 00:22सामान्य
रोग00:22 – 01:46टालें
काल01:46 – 03:09टालें
लाभ03:09 – 04:33शुभ
उद्वेग04:33 – 05:56टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5607:00दिन
चंद्र07:0008:05दिन
शनि08:0509:09दिन
गुरु09:0910:13दिन
मंगल10:1311:18दिन
सूर्य11:1812:22दिन
शुक्र12:2213:27दिन
बुध13:2714:31दिन
चंद्र14:3115:35दिन
शनि15:3516:40दिन
गुरु16:4017:44दिन
मंगल17:4418:49दिन
सूर्य18:4919:44रात
शुक्र19:4420:40रात
बुध20:4021:36रात
चंद्र21:3622:31रात
शनि22:3123:27रात
गुरु23:2700:22रात
मंगल00:2201:18रात
सूर्य01:1802:14रात
शुक्र02:1403:09रात
बुध03:0904:05रात
चंद्र04:0505:00रात
शनि05:0005:56रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जून 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 जुल॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जुल॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 जुल॰ 2029आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
15 जुल॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 जुल॰ 2029कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
21 जुल॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 जुल॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 जुल॰ 2029आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां बेंगलुरु में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2690° (लाहिड़ी)। समय बेंगलुरु (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।