16 अक्टूबर 2029 को भावनगर का पंचांग

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2029, भावनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2029 को भावनगर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (05:23, 17 अक्टू॰ तक), नक्षत्र श्रवण (17:22 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 18:15 पर है। राहुकाल 15:21 से 16:48 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 18:15
रात 06:38 तक
तिथि
दशमी, 05:23 तक
एकादशी
नक्षत्र
श्रवण, 17:22 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल दशमी 05:23, 17 अक्टू॰ तक
शुक्ल एकादशी 06:38, 18 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 17:22 तक
धनिष्ठा 18:58, 17 अक्टू॰ तक
योग
धृति 07:11 तक
शूलअशुभ 06:43, 17 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 16:56 तक
गर 05:23, 17 अक्टू॰ तक
वणिज 17:57, 17 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मकर 06:06, 17 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
18:15
चंद्रोदय
14:30
चंद्रास्त
01:20
दिनमान
11h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:58 – 05:48
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:50

अशुभ समय

राहुकाल
15:21 – 16:48
यमगंड
09:32 – 10:59
गुलिक काल
12:26 – 13:54

16 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:37 – 08:04टालें
उद्वेग08:04 – 09:32टालें
चर09:32 – 10:59सामान्य
लाभ10:59 – 12:26शुभ
अमृत12:26 – 13:54शुभ
काल13:54 – 15:21टालें
शुभ15:21 – 16:48शुभ
रोग16:48 – 18:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:15 – 19:48टालें
लाभ19:48 – 21:21शुभ
उद्वेग21:21 – 22:54टालें
शुभ22:54 – 00:26शुभ
अमृत00:26 – 01:59शुभ
चर01:59 – 03:32सामान्य
रोग03:32 – 05:05टालें
काल05:05 – 06:38टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3707:35दिन
सूर्य07:3508:34दिन
शुक्र08:3409:32दिन
बुध09:3210:30दिन
चंद्र10:3011:28दिन
शनि11:2812:26दिन
गुरु12:2613:24दिन
मंगल13:2414:23दिन
सूर्य14:2315:21दिन
शुक्र15:2116:19दिन
बुध16:1917:17दिन
चंद्र17:1718:15दिन
शनि18:1519:17रात
गुरु19:1720:19रात
मंगल20:1921:21रात
सूर्य21:2122:23रात
शुक्र22:2323:25रात
बुध23:2500:26रात
चंद्र00:2601:28रात
शनि01:2802:30रात
गुरु02:3003:32रात
मंगल03:3204:34रात
सूर्य04:3405:36रात
शुक्र05:3606:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां भावनगर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2732° (लाहिड़ी)। समय भावनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।