6 अक्टूबर 2029 को बर्मिंघम का पंचांग

शनिवार, 6 अक्टूबर 2029, बर्मिंघम, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

शनिवार, 6 अक्टूबर 2029 को बर्मिंघम में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (23:56 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (03:36, 7 अक्टू॰ तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 07:17 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है। राहुकाल 10:06 से 11:30 तक है।

दिन और रात
दिन 07:17 – 18:32
रात 07:19 तक
तिथि
चतुर्दशी, 23:56 तक
अमावस्या
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 03:36 तक
हस्त
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 23:56 तक
अमावस्या 20:14, 7 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 03:36, 7 अक्टू॰ तक
हस्त 00:39, 8 अक्टू॰ तक
योग
शुक्ल 12:52 तक
ब्रह्म 08:47, 7 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:41 तक
शकुनि 23:56 तक
चतुष्पद 10:07, 7 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 11:39 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:17
सूर्यास्त
18:32
चंद्रोदय
05:29
चंद्रास्त
17:28
दिनमान
11h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:35 – 06:26
अभिजीत मुहूर्त
12:32 – 13:17

अशुभ समय

राहुकाल
10:06 – 11:30
यमगंड
14:19 – 15:43
गुलिक काल
07:17 – 08:42

6 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:17 – 08:42टालें
शुभ08:42 – 10:06शुभ
रोग10:06 – 11:30टालें
उद्वेग11:30 – 12:55टालें
चर12:55 – 14:19सामान्य
लाभ14:19 – 15:43शुभ
अमृत15:43 – 17:08शुभ
काल17:08 – 18:32टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:32 – 20:08शुभ
उद्वेग20:08 – 21:44टालें
शुभ21:44 – 23:20शुभ
अमृत23:20 – 00:56शुभ
चर00:56 – 02:31सामान्य
रोग02:31 – 04:07टालें
काल04:07 – 05:43टालें
लाभ05:43 – 07:19शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:1708:13दिन
गुरु08:1309:10दिन
मंगल09:1010:06दिन
सूर्य10:0611:02दिन
शुक्र11:0211:58दिन
बुध11:5812:55दिन
चंद्र12:5513:51दिन
शनि13:5114:47दिन
गुरु14:4715:43दिन
मंगल15:4316:40दिन
सूर्य16:4017:36दिन
शुक्र17:3618:32दिन
बुध18:3219:36रात
चंद्र19:3620:40रात
शनि20:4021:44रात
गुरु21:4422:48रात
मंगल22:4823:52रात
सूर्य23:5200:56रात
शुक्र00:5601:59रात
बुध01:5903:03रात
चंद्र03:0304:07रात
शनि04:0705:11रात
गुरु05:1106:15रात
मंगल06:1507:19रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
10 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां बर्मिंघम में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2728° (लाहिड़ी)। समय बर्मिंघम (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।