18 जनवरी 2004 को चेन्नई का पंचांग

रविवार, 18 जनवरी 2004, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 18 जनवरी 2004 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (14:38 तक), नक्षत्र अनुराधा (16:14 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 18:02 पर है। राहुकाल 16:36 से 18:02 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 18:02
रात 06:35 तक
तिथि
एकादशी, 14:38 तक
द्वादशी
नक्षत्र
अनुराधा, 16:14 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 जनवरी 2004 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 14:38 तक
कृष्ण द्वादशी 11:42, 19 जन॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 14:00, 19 जन॰ तक
योग
वृद्धि 01:48, 19 जन॰ तक
ध्रुव 22:05, 19 जन॰ तक
करण
बालव 14:38 तक
कौलव 01:12, 19 जन॰ तक
तैतिल 11:42, 19 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
18:02
चंद्रोदय
02:44
चंद्रास्त
14:26
दिनमान
11h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2060
शक संवत
1925, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
16:36 – 18:02
यमगंड
12:19 – 13:45
गुलिक काल
15:10 – 16:36

18 जनवरी 2004 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:35 – 08:01टालें
चर08:01 – 09:27सामान्य
लाभ09:27 – 10:53शुभ
अमृत10:53 – 12:19शुभ
काल12:19 – 13:45टालें
शुभ13:45 – 15:10शुभ
रोग15:10 – 16:36टालें
उद्वेग16:36 – 18:02टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:02 – 19:36शुभ
अमृत19:36 – 21:10शुभ
चर21:10 – 22:45सामान्य
रोग22:45 – 00:19टालें
काल00:19 – 01:53टालें
लाभ01:53 – 03:27शुभ
उद्वेग03:27 – 05:01टालें
शुभ05:01 – 06:35शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:3507:32दिन
शुक्र07:3208:30दिन
बुध08:3009:27दिन
चंद्र09:2710:24दिन
शनि10:2411:21दिन
गुरु11:2112:19दिन
मंगल12:1913:16दिन
सूर्य13:1614:13दिन
शुक्र14:1315:10दिन
बुध15:1016:08दिन
चंद्र16:0817:05दिन
शनि17:0518:02दिन
गुरु18:0219:05रात
मंगल19:0520:08रात
सूर्य20:0821:10रात
शुक्र21:1022:13रात
बुध22:1323:16रात
चंद्र23:1600:19रात
शनि00:1901:21रात
गुरु01:2102:24रात
मंगल02:2403:27रात
सूर्य03:2704:30रात
शुक्र04:3005:32रात
बुध05:3206:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 जन॰ 2004कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जन॰ 2004प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 जन॰ 2004माघ अमावस्याअमावस्या
25 जन॰ 2004विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 फ़र॰ 2004शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 फ़र॰ 2004प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2004माघ पूर्णिमापूर्णिमा
10 फ़र॰ 2004संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 फ़र॰ 2004कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2004कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2004कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9136° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।