3 जनवरी 2006 को चेन्नई का पंचांग

मंगलवार, 3 जनवरी 2006, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 3 जनवरी 2006 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (19:59 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (19:13 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:31 पर और सूर्यास्त 17:54 पर है। राहुकाल 15:04 से 16:29 तक है।

दिन और रात
दिन 06:31 – 17:54
रात 06:32 तक
तिथि
चतुर्थी, 19:59 तक
पंचमी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 19:13 तक
शतभिषा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 जनवरी 2006 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 19:59 तक
शुक्ल पंचमी 17:15, 4 जन॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 17:11, 4 जन॰ तक
योग
वज्रअशुभ 10:25 तक
सिद्धि 06:49, 4 जन॰ तक
करण
वणिज 09:28 तक
विष्टि (भद्रा) 19:59 तक
बव 06:34, 4 जन॰ तक
चंद्र राशि
मकर 08:21 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:31
सूर्यास्त
17:54
चंद्रोदय
09:27
चंद्रास्त
21:22
दिनमान
11h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2062
शक संवत
1927, पार्थिव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:50 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
15:04 – 16:29
यमगंड
09:22 – 10:47
गुलिक काल
12:13 – 13:38

3 जनवरी 2006 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:31 – 07:57टालें
उद्वेग07:57 – 09:22टालें
चर09:22 – 10:47सामान्य
लाभ10:47 – 12:13शुभ
अमृत12:13 – 13:38शुभ
काल13:38 – 15:04टालें
शुभ15:04 – 16:29शुभ
रोग16:29 – 17:54टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:54 – 19:29टालें
लाभ19:29 – 21:04शुभ
उद्वेग21:04 – 22:38टालें
शुभ22:38 – 00:13शुभ
अमृत00:13 – 01:48शुभ
चर01:48 – 03:22सामान्य
रोग03:22 – 04:57टालें
काल04:57 – 06:32टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3107:28दिन
सूर्य07:2808:25दिन
शुक्र08:2509:22दिन
बुध09:2210:19दिन
चंद्र10:1911:16दिन
शनि11:1612:13दिन
गुरु12:1313:10दिन
मंगल13:1014:07दिन
सूर्य14:0715:04दिन
शुक्र15:0416:00दिन
बुध16:0016:57दिन
चंद्र16:5717:54दिन
शनि17:5418:57रात
गुरु18:5720:00रात
मंगल20:0021:04रात
सूर्य21:0422:07रात
शुक्र22:0723:10रात
बुध23:1000:13रात
चंद्र00:1301:16रात
शनि01:1602:19रात
गुरु02:1903:22रात
मंगल03:2204:26रात
सूर्य04:2605:29रात
शुक्र05:2906:32रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 जन॰ 2006विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 जन॰ 2006शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 जन॰ 2006प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 जन॰ 2006पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2006मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2006संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 जन॰ 2006कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 जन॰ 2006कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2006प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2006माघ अमावस्याअमावस्या
1 फ़र॰ 2006विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9409° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।