11 जनवरी 2007 को चेन्नई का पंचांग

गुरुवार, 11 जनवरी 2007, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 11 जनवरी 2007 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (07:31, 12 जन॰ तक), नक्षत्र हस्त (10:54 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:34 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 13:42 से 15:07 तक है।

दिन और रात
दिन 06:34 – 17:59
रात 06:34 तक
तिथि
अष्टमी
नक्षत्र
हस्त, 10:54 तक
चित्रा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 जनवरी 2007 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 07:31, 12 जन॰ तक
नक्षत्र
हस्त 10:54 तक
चित्रा 13:52, 12 जन॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 10:57 तक
सुकर्मा 11:48, 12 जन॰ तक
करण
बालव 18:14 तक
कौलव 07:31, 12 जन॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 00:25, 12 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:34
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
11:39
दिनमान
11h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2063
शक संवत
1928, व्यय संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:43
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
13:42 – 15:07
यमगंड
06:34 – 07:59
गुलिक काल
09:25 – 10:51

11 जनवरी 2007 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:34 – 07:59शुभ
रोग07:59 – 09:25टालें
उद्वेग09:25 – 10:51टालें
चर10:51 – 12:16सामान्य
लाभ12:16 – 13:42शुभ
अमृत13:42 – 15:07शुभ
काल15:07 – 16:33टालें
शुभ16:33 – 17:59शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:59 – 19:33शुभ
चर19:33 – 21:07सामान्य
रोग21:07 – 22:42टालें
काल22:42 – 00:16टालें
लाभ00:16 – 01:51शुभ
उद्वेग01:51 – 03:25टालें
शुभ03:25 – 05:00शुभ
अमृत05:00 – 06:34शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3407:31दिन
मंगल07:3108:28दिन
सूर्य08:2809:25दिन
शुक्र09:2510:22दिन
बुध10:2211:19दिन
चंद्र11:1912:16दिन
शनि12:1613:13दिन
गुरु13:1314:10दिन
मंगल14:1015:07दिन
सूर्य15:0716:04दिन
शुक्र16:0417:02दिन
बुध17:0217:59दिन
चंद्र17:5919:02रात
शनि19:0220:04रात
गुरु20:0421:07रात
मंगल21:0722:10रात
सूर्य22:1023:13रात
शुक्र23:1300:16रात
बुध00:1601:19रात
चंद्र01:1902:22रात
शनि02:2203:25रात
गुरु03:2504:28रात
मंगल04:2805:31रात
सूर्य05:3106:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 जन॰ 2007कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2007मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2007कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 जन॰ 2007प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 जन॰ 2007माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2007विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2007शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2007प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2007माघ पूर्णिमापूर्णिमा
6 फ़र॰ 2007संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9552° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।