15 जनवरी 2007 को चेन्नई का पंचांग

सोमवार, 15 जनवरी 2007, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 15 जनवरी 2007 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (12:29 तक), नक्षत्र अनुराधा (19:48 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 18:01 पर है। राहुकाल 08:00 से 09:26 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 18:01
रात 06:35 तक
तिथि
एकादशी, 12:29 तक
द्वादशी
नक्षत्र
अनुराधा, 19:48 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 जनवरी 2007 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 12:29 तक
कृष्ण द्वादशी 12:44, 16 जन॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 20:24, 16 जन॰ तक
योग
गंडअशुभ 12:05 तक
वृद्धि 11:07, 16 जन॰ तक
करण
बालव 12:29 तक
कौलव 00:42, 16 जन॰ तक
तैतिल 12:44, 16 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
18:01
चंद्रोदय
02:52
चंद्रास्त
14:24
दिनमान
11h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2063
शक संवत
1928, व्यय संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:44
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:41

अशुभ समय

राहुकाल
08:00 – 09:26
यमगंड
10:52 – 12:18
गुलिक काल
13:43 – 15:09

15 जनवरी 2007 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:35 – 08:00शुभ
काल08:00 – 09:26टालें
शुभ09:26 – 10:52शुभ
रोग10:52 – 12:18टालें
उद्वेग12:18 – 13:43टालें
चर13:43 – 15:09सामान्य
लाभ15:09 – 16:35शुभ
अमृत16:35 – 18:01शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:01 – 19:35सामान्य
रोग19:35 – 21:09टालें
काल21:09 – 22:44टालें
लाभ22:44 – 00:18शुभ
उद्वेग00:18 – 01:52टालें
शुभ01:52 – 03:26शुभ
अमृत03:26 – 05:01शुभ
चर05:01 – 06:35सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:3507:32दिन
शनि07:3208:29दिन
गुरु08:2909:26दिन
मंगल09:2610:23दिन
सूर्य10:2311:21दिन
शुक्र11:2112:18दिन
बुध12:1813:15दिन
चंद्र13:1514:12दिन
शनि14:1215:09दिन
गुरु15:0916:06दिन
मंगल16:0617:04दिन
सूर्य17:0418:01दिन
शुक्र18:0119:04रात
बुध19:0420:06रात
चंद्र20:0621:09रात
शनि21:0922:12रात
गुरु22:1223:15रात
मंगल23:1500:18रात
सूर्य00:1801:21रात
शुक्र01:2102:23रात
बुध02:2303:26रात
चंद्र03:2604:29रात
शनि04:2905:32रात
गुरु05:3206:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 जन॰ 2007कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 जन॰ 2007प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 जन॰ 2007माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2007विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2007शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2007प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2007माघ पूर्णिमापूर्णिमा
6 फ़र॰ 2007संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 फ़र॰ 2007कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2007कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2007कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9554° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।