21 जनवरी 2007 को चेन्नई का पंचांग

रविवार, 21 जनवरी 2007, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 21 जनवरी 2007 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (02:44, 22 जन॰ तक), नक्षत्र धनिष्ठा (15:20 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 16:38 से 18:04 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 18:04
रात 06:35 तक
तिथि
तृतीया, 02:44 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 15:20 तक
शतभिषा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 जनवरी 2007 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 02:44, 22 जन॰ तक
शुक्ल चतुर्थी 00:16, 23 जन॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 13:34, 22 जन॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 20:00 तक
वरीयान 16:45, 22 जन॰ तक
करण
तैतिल 15:57 तक
गर 02:44, 22 जन॰ तक
वणिज 13:29, 22 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
08:20
चंद्रास्त
20:19
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2063
शक संवत
1928, व्यय संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
16:38 – 18:04
यमगंड
12:20 – 13:46
गुलिक काल
15:12 – 16:38

21 जनवरी 2007 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:35 – 08:01टालें
चर08:01 – 09:27सामान्य
लाभ09:27 – 10:54शुभ
अमृत10:54 – 12:20शुभ
काल12:20 – 13:46टालें
शुभ13:46 – 15:12शुभ
रोग15:12 – 16:38टालें
उद्वेग16:38 – 18:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:04 – 19:38शुभ
अमृत19:38 – 21:12शुभ
चर21:12 – 22:46सामान्य
रोग22:46 – 00:20टालें
काल00:20 – 01:54टालें
लाभ01:54 – 03:28शुभ
उद्वेग03:28 – 05:01टालें
शुभ05:01 – 06:35शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:3507:33दिन
शुक्र07:3308:30दिन
बुध08:3009:27दिन
चंद्र09:2710:25दिन
शनि10:2511:22दिन
गुरु11:2212:20दिन
मंगल12:2013:17दिन
सूर्य13:1714:14दिन
शुक्र14:1415:12दिन
बुध15:1216:09दिन
चंद्र16:0917:07दिन
शनि17:0718:04दिन
गुरु18:0419:07रात
मंगल19:0720:09रात
सूर्य20:0921:12रात
शुक्र21:1222:14रात
बुध22:1423:17रात
चंद्र23:1700:20रात
शनि00:2001:22रात
गुरु01:2202:25रात
मंगल02:2503:28रात
सूर्य03:2804:30रात
शुक्र04:3005:33रात
बुध05:3306:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2007विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2007शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2007प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2007माघ पूर्णिमापूर्णिमा
6 फ़र॰ 2007संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 फ़र॰ 2007कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2007कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2007कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2007प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2007फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9556° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।