8 जनवरी 2009 को चेन्नई का पंचांग

गुरुवार, 8 जनवरी 2009, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 8 जनवरी 2009 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (19:48 तक), नक्षत्र रोहिणी (03:36, 9 जन॰ तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 06:33 पर और सूर्यास्त 17:57 पर है। राहुकाल 13:41 से 15:06 तक है।

दिन और रात
दिन 06:33 – 17:57
रात 06:33 तक
तिथि
द्वादशी, 19:48 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
रोहिणी, 03:36 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 जनवरी 2009 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 19:48 तक
शुक्ल त्रयोदशी 16:18, 9 जन॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 03:36, 9 जन॰ तक
मृगशिरा 00:45, 10 जन॰ तक
योग
शुभ 10:24 तक
शुक्ल 06:24, 9 जन॰ तक
ब्रह्म 02:12, 10 जन॰ तक
करण
बव 09:26 तक
बालव 19:48 तक
कौलव 06:05, 9 जन॰ तक
तैतिल 16:18, 9 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:33
सूर्यास्त
17:57
चंद्रोदय
14:58
चंद्रास्त
03:19
दिनमान
11h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2065
शक संवत
1930, सर्वधारी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:52 – 05:43
अभिजीत मुहूर्त
11:52 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
13:41 – 15:06
यमगंड
06:33 – 07:59
गुलिक काल
09:24 – 10:50

8 जनवरी 2009 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:33 – 07:59शुभ
रोग07:59 – 09:24टालें
उद्वेग09:24 – 10:50टालें
चर10:50 – 12:15सामान्य
लाभ12:15 – 13:41शुभ
अमृत13:41 – 15:06शुभ
काल15:06 – 16:32टालें
शुभ16:32 – 17:57शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:57 – 19:32शुभ
चर19:32 – 21:06सामान्य
रोग21:06 – 22:41टालें
काल22:41 – 00:15टालें
लाभ00:15 – 01:50शुभ
उद्वेग01:50 – 03:24टालें
शुभ03:24 – 04:59शुभ
अमृत04:59 – 06:33शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3307:30दिन
मंगल07:3008:27दिन
सूर्य08:2709:24दिन
शुक्र09:2410:21दिन
बुध10:2111:18दिन
चंद्र11:1812:15दिन
शनि12:1513:12दिन
गुरु13:1214:09दिन
मंगल14:0915:06दिन
सूर्य15:0616:03दिन
शुक्र16:0317:00दिन
बुध17:0017:57दिन
चंद्र17:5719:00रात
शनि19:0020:03रात
गुरु20:0321:06रात
मंगल21:0622:09रात
सूर्य22:0923:12रात
शुक्र23:1200:15रात
बुध00:1501:18रात
चंद्र01:1802:21रात
शनि02:2103:24रात
गुरु03:2404:27रात
मंगल04:2705:30रात
सूर्य05:3006:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 जन॰ 2009प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 जन॰ 2009पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2009संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 जन॰ 2009मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2009कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जन॰ 2009कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 जन॰ 2009प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2009माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2009विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 फ़र॰ 2009शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9831° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।