31 दिसंबर 2017 को चेन्नई का पंचांग

रविवार, 31 दिसंबर 2017, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 31 दिसंबर 2017 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (15:28 तक), नक्षत्र रोहिणी (17:53 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 06:30 पर और सूर्यास्त 17:53 पर है। राहुकाल 16:27 से 17:53 तक है।

दिन और रात
दिन 06:30 – 17:53
रात 06:31 तक
तिथि
त्रयोदशी, 15:28 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
रोहिणी, 17:53 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 दिसंबर 2017 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 15:28 तक
शुक्ल चतुर्दशी 11:44, 1 जन॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 17:53 तक
मृगशिरा 14:52, 1 जन॰ तक
योग
शुभ 14:04 तक
शुक्ल 09:46, 1 जन॰ तक
करण
तैतिल 15:28 तक
गर 01:38, 1 जन॰ तक
वणिज 11:44, 1 जन॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 04:24, 1 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:30
सूर्यास्त
17:53
चंद्रोदय
16:14
चंद्रास्त
04:18
दिनमान
11h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2074
शक संवत
1939, हेमलंब संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:49 – 05:40
अभिजीत मुहूर्त
11:49 – 12:34

अशुभ समय

राहुकाल
16:27 – 17:53
यमगंड
12:11 – 13:37
गुलिक काल
15:02 – 16:27

31 दिसंबर 2017 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:30 – 07:56टालें
चर07:56 – 09:21सामान्य
लाभ09:21 – 10:46शुभ
अमृत10:46 – 12:11शुभ
काल12:11 – 13:37टालें
शुभ13:37 – 15:02शुभ
रोग15:02 – 16:27टालें
उद्वेग16:27 – 17:53टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:53 – 19:27शुभ
अमृत19:27 – 21:02शुभ
चर21:02 – 22:37सामान्य
रोग22:37 – 00:12टालें
काल00:12 – 01:46टालें
लाभ01:46 – 03:21शुभ
उद्वेग03:21 – 04:56टालें
शुभ04:56 – 06:31शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:3007:27दिन
शुक्र07:2708:24दिन
बुध08:2409:21दिन
चंद्र09:2110:18दिन
शनि10:1811:15दिन
गुरु11:1512:11दिन
मंगल12:1113:08दिन
सूर्य13:0814:05दिन
शुक्र14:0515:02दिन
बुध15:0215:59दिन
चंद्र15:5916:56दिन
शनि16:5617:53दिन
गुरु17:5318:56रात
मंगल18:5619:59रात
सूर्य19:5921:02रात
शुक्र21:0222:05रात
बुध22:0523:08रात
चंद्र23:0800:12रात
शनि00:1201:15रात
गुरु01:1502:18रात
मंगल02:1803:21रात
सूर्य03:2104:24रात
शुक्र04:2405:28रात
बुध05:2806:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 दिस॰ 2017प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 जन॰ 2018पौष पूर्णिमापूर्णिमा
5 जन॰ 2018संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 जन॰ 2018कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 जन॰ 2018कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2018प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2018मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2018माघ अमावस्याअमावस्या
21 जन॰ 2018विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 जन॰ 2018शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 जन॰ 2018प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1085° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।