3 जनवरी 2018 को चेन्नई का पंचांग

बुधवार, 3 जनवरी 2018, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 3 जनवरी 2018 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (00:37, 4 जन॰ तक), नक्षत्र पुनर्वसु (08:48 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:31 पर और सूर्यास्त 17:54 पर है। राहुकाल 12:13 से 13:38 तक है।

दिन और रात
दिन 06:31 – 17:54
रात 06:32 तक
तिथि
द्वितीया, 00:37 तक
तृतीया
नक्षत्र
पुष्य, 06:07 तक
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 जनवरी 2018 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 00:37, 4 जन॰ तक
कृष्ण तृतीया 21:31, 4 जन॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 06:07, 4 जन॰ तक
आश्लेषा 03:53, 5 जन॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 20:52 तक
विष्कंभअशुभ 17:01, 4 जन॰ तक
करण
तैतिल 14:20 तक
गर 00:37, 4 जन॰ तक
वणिज 11:00, 4 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:31
सूर्यास्त
17:54
चंद्रोदय
19:24
चंद्रास्त
07:29
दिनमान
11h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2074
शक संवत
1939, हेमलंब संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:50 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:36 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:13 – 13:38
यमगंड
07:57 – 09:22
गुलिक काल
10:47 – 12:13

3 जनवरी 2018 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:31 – 07:57शुभ
अमृत07:57 – 09:22शुभ
काल09:22 – 10:47टालें
शुभ10:47 – 12:13शुभ
रोग12:13 – 13:38टालें
उद्वेग13:38 – 15:04टालें
चर15:04 – 16:29सामान्य
लाभ16:29 – 17:54शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:54 – 19:29टालें
शुभ19:29 – 21:04शुभ
अमृत21:04 – 22:38शुभ
चर22:38 – 00:13सामान्य
रोग00:13 – 01:48टालें
काल01:48 – 03:22टालें
लाभ03:22 – 04:57शुभ
उद्वेग04:57 – 06:32टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3107:28दिन
चंद्र07:2808:25दिन
शनि08:2509:22दिन
गुरु09:2210:19दिन
मंगल10:1911:16दिन
सूर्य11:1612:13दिन
शुक्र12:1313:10दिन
बुध13:1014:07दिन
चंद्र14:0715:04दिन
शनि15:0416:00दिन
गुरु16:0016:57दिन
मंगल16:5717:54दिन
सूर्य17:5418:57रात
शुक्र18:5720:00रात
बुध20:0021:04रात
चंद्र21:0422:07रात
शनि22:0723:10रात
गुरु23:1000:13रात
मंगल00:1301:16रात
सूर्य01:1602:19रात
शुक्र02:1903:22रात
बुध03:2204:26रात
चंद्र04:2605:29रात
शनि05:2906:32रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 जन॰ 2018संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 जन॰ 2018कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 जन॰ 2018कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2018प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2018मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2018माघ अमावस्याअमावस्या
21 जन॰ 2018विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 जन॰ 2018शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 जन॰ 2018प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 जन॰ 2018माघ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.1086° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।