5 जनवरी 2075 को चेन्नई का पंचांग

शनिवार, 5 जनवरी 2075, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 5 जनवरी 2075 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (20:38 तक), नक्षत्र आश्लेषा (03:23, 6 जन॰ तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:32 पर और सूर्यास्त 17:55 पर है। राहुकाल 09:23 से 10:48 तक है।

दिन और रात
दिन 06:32 – 17:55
रात 06:32 तक
तिथि
तृतीया, 20:38 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
आश्लेषा, 03:23 तक
मघा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 जनवरी 2075 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 20:38 तक
कृष्ण चतुर्थी 21:37, 6 जन॰ तक
नक्षत्र
आश्लेषा 03:23, 6 जन॰ तक
मघा 04:46, 7 जन॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 14:07 तक
प्रीति 13:49, 6 जन॰ तक
करण
वणिज 07:57 तक
विष्टि (भद्रा) 20:38 तक
बव 09:11, 6 जन॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 03:23, 6 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:32
सूर्यास्त
17:55
चंद्रोदय
20:30
चंद्रास्त
08:39
दिनमान
11h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2131
शक संवत
1996, जय संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:51 – 05:42
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:36

अशुभ समय

राहुकाल
09:23 – 10:48
यमगंड
13:39 – 15:04
गुलिक काल
06:32 – 07:57

5 जनवरी 2075 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:32 – 07:57टालें
शुभ07:57 – 09:23शुभ
रोग09:23 – 10:48टालें
उद्वेग10:48 – 12:14टालें
चर12:14 – 13:39सामान्य
लाभ13:39 – 15:04शुभ
अमृत15:04 – 16:30शुभ
काल16:30 – 17:55टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:55 – 19:30शुभ
उद्वेग19:30 – 21:05टालें
शुभ21:05 – 22:39शुभ
अमृत22:39 – 00:14शुभ
चर00:14 – 01:48सामान्य
रोग01:48 – 03:23टालें
काल03:23 – 04:58टालें
लाभ04:58 – 06:32शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3207:29दिन
गुरु07:2908:26दिन
मंगल08:2609:23दिन
सूर्य09:2310:20दिन
शुक्र10:2011:17दिन
बुध11:1712:14दिन
चंद्र12:1413:11दिन
शनि13:1114:08दिन
गुरु14:0815:04दिन
मंगल15:0416:01दिन
सूर्य16:0116:58दिन
शुक्र16:5817:55दिन
बुध17:5518:58रात
चंद्र18:5820:01रात
शनि20:0121:05रात
गुरु21:0522:08रात
मंगल22:0823:11रात
सूर्य23:1100:14रात
शुक्र00:1401:17रात
बुध01:1702:20रात
चंद्र02:2003:23रात
शनि03:2304:26रात
गुरु04:2605:29रात
मंगल05:2906:32रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 जन॰ 2075संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 जन॰ 2075कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 जन॰ 2075कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 जन॰ 2075प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 जन॰ 2075मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2075माघ अमावस्याअमावस्या
20 जन॰ 2075विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 जन॰ 2075शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 जन॰ 2075प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2075माघ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.9050° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।