11 जनवरी 2075 को चेन्नई का पंचांग

शुक्रवार, 11 जनवरी 2075, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 11 जनवरी 2075 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (18:11 तक), नक्षत्र स्वाति (03:27, 12 जन॰ तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:34 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 10:51 से 12:16 तक है।

दिन और रात
दिन 06:34 – 17:59
रात 06:34 तक
तिथि
नवमी, 18:11 तक
दशमी
नक्षत्र
स्वाति, 03:27 तक
विशाखा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 जनवरी 2075 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण नवमी 18:11 तक
कृष्ण दशमी 15:49, 12 जन॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 03:27, 12 जन॰ तक
विशाखा 01:36, 13 जन॰ तक
योग
धृति 03:06, 12 जन॰ तक
शूलअशुभ 23:48, 12 जन॰ तक
करण
तैतिल 07:10 तक
गर 18:11 तक
वणिज 05:03, 12 जन॰ तक
विष्टि (भद्रा) 15:49, 12 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:34
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
00:49
चंद्रास्त
12:59
दिनमान
11h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2131
शक संवत
1996, जय संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:43
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
10:51 – 12:16
यमगंड
15:07 – 16:33
गुलिक काल
07:59 – 09:25

11 जनवरी 2075 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:34 – 07:59सामान्य
लाभ07:59 – 09:25शुभ
अमृत09:25 – 10:51शुभ
काल10:51 – 12:16टालें
शुभ12:16 – 13:42शुभ
रोग13:42 – 15:07टालें
उद्वेग15:07 – 16:33टालें
चर16:33 – 17:59सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:59 – 19:33टालें
काल19:33 – 21:08टालें
लाभ21:08 – 22:42शुभ
उद्वेग22:42 – 00:16टालें
शुभ00:16 – 01:51शुभ
अमृत01:51 – 03:25शुभ
चर03:25 – 05:00सामान्य
रोग05:00 – 06:34टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:3407:31दिन
बुध07:3108:28दिन
चंद्र08:2809:25दिन
शनि09:2510:22दिन
गुरु10:2211:19दिन
मंगल11:1912:16दिन
सूर्य12:1613:13दिन
शुक्र13:1314:10दिन
बुध14:1015:07दिन
चंद्र15:0716:05दिन
शनि16:0517:02दिन
गुरु17:0217:59दिन
मंगल17:5919:02रात
सूर्य19:0220:05रात
शुक्र20:0521:08रात
बुध21:0822:10रात
चंद्र22:1023:13रात
शनि23:1300:16रात
गुरु00:1601:19रात
मंगल01:1902:22रात
सूर्य02:2203:25रात
शुक्र03:2504:28रात
बुध04:2805:31रात
चंद्र05:3106:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 जन॰ 2075कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 जन॰ 2075प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 जन॰ 2075मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2075माघ अमावस्याअमावस्या
20 जन॰ 2075विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 जन॰ 2075शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 जन॰ 2075प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2075माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2075संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 फ़र॰ 2075कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.9053° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।