20 जनवरी 2083 को चेन्नई का पंचांग

बुधवार, 20 जनवरी 2083, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 20 जनवरी 2083 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (07:17 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (21:01 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 12:19 से 13:45 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 18:04
रात 06:35 तक
तिथि
तृतीया
नक्षत्र
धनिष्ठा, 21:01 तक
शतभिषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 जनवरी 2083 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 07:17 तक
शुक्ल तृतीया 07:12, 21 जन॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 21:55, 21 जन॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 04:21, 21 जन॰ तक
वरीयान 03:34, 22 जन॰ तक
करण
कौलव 07:17 तक
तैतिल 19:09 तक
गर 07:12, 21 जन॰ तक
चंद्र राशि
मकर 08:49 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
08:09
चंद्रास्त
20:09
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2139
शक संवत
2004, शुभकृत संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:42 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:19 – 13:45
यमगंड
08:01 – 09:27
गुलिक काल
10:53 – 12:19

20 जनवरी 2083 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:35 – 08:01शुभ
अमृत08:01 – 09:27शुभ
काल09:27 – 10:53टालें
शुभ10:53 – 12:19शुभ
रोग12:19 – 13:45टालें
उद्वेग13:45 – 15:11टालें
चर15:11 – 16:38सामान्य
लाभ16:38 – 18:04शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:04 – 19:38टालें
शुभ19:38 – 21:11शुभ
अमृत21:11 – 22:45शुभ
चर22:45 – 00:19सामान्य
रोग00:19 – 01:53टालें
काल01:53 – 03:27टालें
लाभ03:27 – 05:01शुभ
उद्वेग05:01 – 06:35टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3507:32दिन
चंद्र07:3208:30दिन
शनि08:3009:27दिन
गुरु09:2710:25दिन
मंगल10:2511:22दिन
सूर्य11:2212:19दिन
शुक्र12:1913:17दिन
बुध13:1714:14दिन
चंद्र14:1415:11दिन
शनि15:1116:09दिन
गुरु16:0917:06दिन
मंगल17:0618:04दिन
सूर्य18:0419:06रात
शुक्र19:0620:09रात
बुध20:0921:11रात
चंद्र21:1122:14रात
शनि22:1423:17रात
गुरु23:1700:19रात
मंगल00:1901:22रात
सूर्य01:2202:25रात
शुक्र02:2503:27रात
बुध03:2704:30रात
चंद्र04:3005:33रात
शनि05:3306:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जन॰ 2083विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2083शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2083प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2083माघ पूर्णिमापूर्णिमा
6 फ़र॰ 2083संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 फ़र॰ 2083कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 फ़र॰ 2083कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2083कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2083प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 फ़र॰ 2083फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 25.0174° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।