4 नवंबर 2026 को शिकागो का पंचांग

बुधवार, 4 नवंबर 2026, शिकागो, संयुक्त राज्य। समय America/Chicago में है।

बुधवार, 4 नवंबर 2026 को शिकागो में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (23:06 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (16:00 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:26 पर और सूर्यास्त 16:40 पर है। राहुकाल 11:33 से 12:50 तक है।

दिन और रात
दिन 06:26 – 16:40
रात 06:27 तक
तिथि
एकादशी, 23:06 तक
द्वादशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 16:00 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 नवंबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 23:06 तक
कृष्ण द्वादशी 23:01, 5 नव॰ तक
नक्षत्र
योग
इंद्र 18:56 तक
वैधृतिअशुभ 17:39, 5 नव॰ तक
करण
बव 11:17 तक
बालव 23:06 तक
कौलव 11:00, 5 नव॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 22:04 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:26
सूर्यास्त
16:40
चंद्रोदय
01:32
चंद्रास्त
14:21
दिनमान
10h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:36 – 05:31
अभिजीत मुहूर्त
11:13 – 11:54 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:33 – 12:50
यमगंड
07:43 – 09:00
गुलिक काल
10:17 – 11:33

4 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:26 – 07:43शुभ
अमृत07:43 – 09:00शुभ
काल09:00 – 10:17टालें
शुभ10:17 – 11:33शुभ
रोग11:33 – 12:50टालें
उद्वेग12:50 – 14:07टालें
चर14:07 – 15:24सामान्य
लाभ15:24 – 16:40शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग16:40 – 18:24टालें
शुभ18:24 – 20:07शुभ
अमृत20:07 – 21:51शुभ
चर21:51 – 23:34सामान्य
रोग23:34 – 01:17टालें
काल01:17 – 03:01टालें
लाभ03:01 – 04:44शुभ
उद्वेग04:44 – 06:27टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:2607:17दिन
चंद्र07:1708:09दिन
शनि08:0909:00दिन
गुरु09:0009:51दिन
मंगल09:5110:42दिन
सूर्य10:4211:33दिन
शुक्र11:3312:25दिन
बुध12:2513:16दिन
चंद्र13:1614:07दिन
शनि14:0714:58दिन
गुरु14:5815:49दिन
मंगल15:4916:40दिन
सूर्य16:4017:49रात
शुक्र17:4918:58रात
बुध18:5820:07रात
चंद्र20:0721:16रात
शनि21:1622:25रात
गुरु22:2523:34रात
मंगल23:3400:43रात
सूर्य00:4301:52रात
शुक्र01:5203:01रात
बुध03:0104:10रात
चंद्र04:1005:19रात
शनि05:1906:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
27 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां शिकागो में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2320° (लाहिड़ी)। समय शिकागो (America/Chicago) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।