24 जनवरी 2027 को कटक का पंचांग

रविवार, 24 जनवरी 2027, कटक, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 24 जनवरी 2027 को कटक में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (10:57 तक), नक्षत्र मघा (02:41, 25 जन॰ तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:24 पर और सूर्यास्त 17:32 पर है। राहुकाल 16:08 से 17:32 तक है।

दिन और रात
दिन 06:24 – 17:32
रात 06:24 तक
तिथि
द्वितीया, 10:57 तक
तृतीया
नक्षत्र
मघा, 02:41 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 जनवरी 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 10:57 तक
कृष्ण तृतीया 08:10, 25 जन॰ तक
नक्षत्र
मघा 02:41, 25 जन॰ तक
योग
सौभाग्य 02:03, 25 जन॰ तक
शोभन 22:54, 25 जन॰ तक
करण
गर 10:57 तक
वणिज 21:30 तक
विष्टि (भद्रा) 08:10, 25 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:24
सूर्यास्त
17:32
चंद्रोदय
19:37
चंद्रास्त
07:44
दिनमान
11h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:41 – 05:33
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:20

अशुभ समय

राहुकाल
16:08 – 17:32
यमगंड
11:58 – 13:22
गुलिक काल
14:45 – 16:08

24 जनवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:24 – 07:48टालें
चर07:48 – 09:11सामान्य
लाभ09:11 – 10:35शुभ
अमृत10:35 – 11:58शुभ
काल11:58 – 13:22टालें
शुभ13:22 – 14:45शुभ
रोग14:45 – 16:08टालें
उद्वेग16:08 – 17:32टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:32 – 19:08शुभ
अमृत19:08 – 20:45शुभ
चर20:45 – 22:21सामान्य
रोग22:21 – 23:58टालें
काल23:58 – 01:34टालें
लाभ01:34 – 03:11शुभ
उद्वेग03:11 – 04:47टालें
शुभ04:47 – 06:24शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:2407:20दिन
शुक्र07:2008:15दिन
बुध08:1509:11दिन
चंद्र09:1110:07दिन
शनि10:0711:02दिन
गुरु11:0211:58दिन
मंगल11:5812:54दिन
सूर्य12:5413:49दिन
शुक्र13:4914:45दिन
बुध14:4515:41दिन
चंद्र15:4116:36दिन
शनि16:3617:32दिन
गुरु17:3218:36रात
मंगल18:3619:41रात
सूर्य19:4120:45रात
शुक्र20:4521:49रात
बुध21:4922:54रात
चंद्र22:5423:58रात
शनि23:5801:02रात
गुरु01:0202:07रात
मंगल02:0703:11रात
सूर्य03:1104:15रात
शुक्र04:1505:20रात
बुध05:2006:24रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 जन॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 जन॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 फ़र॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2027माघ अमावस्याअमावस्या
10 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 फ़र॰ 2027माघ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां कटक में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2351° (लाहिड़ी)। समय कटक (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।