23 सितंबर 2027 को कटक का पंचांग

गुरुवार, 23 सितंबर 2027, कटक, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 23 सितंबर 2027 को कटक में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (02:57, 24 सित॰ तक), नक्षत्र मृगशिरा (17:07 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:35 पर और सूर्यास्त 17:42 पर है। राहुकाल 13:09 से 14:40 तक है।

दिन और रात
दिन 05:35 – 17:42
रात 05:35 तक
तिथि
अष्टमी, 02:57 तक
नवमी
नक्षत्र
मृगशिरा, 17:07 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 सितंबर 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 02:57, 24 सित॰ तक
कृष्ण नवमी 00:55, 25 सित॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 15:58, 24 सित॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 23:35 तक
वरीयान 20:52, 24 सित॰ तक
करण
बालव 15:50 तक
कौलव 02:57, 24 सित॰ तक
तैतिल 13:59, 24 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:35
सूर्यास्त
17:42
चंद्रोदय
23:15
चंद्रास्त
12:13
दिनमान
12h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:00 – 04:47
अभिजीत मुहूर्त
11:14 – 12:03

अशुभ समय

राहुकाल
13:09 – 14:40
यमगंड
05:35 – 07:06
गुलिक काल
08:37 – 10:07

23 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:35 – 07:06शुभ
रोग07:06 – 08:37टालें
उद्वेग08:37 – 10:07टालें
चर10:07 – 11:38सामान्य
लाभ11:38 – 13:09शुभ
अमृत13:09 – 14:40शुभ
काल14:40 – 16:11टालें
शुभ16:11 – 17:42शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:42 – 19:11शुभ
चर19:11 – 20:40सामान्य
रोग20:40 – 22:09टालें
काल22:09 – 23:38टालें
लाभ23:38 – 01:08शुभ
उद्वेग01:08 – 02:37टालें
शुभ02:37 – 04:06शुभ
अमृत04:06 – 05:35शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:3506:35दिन
मंगल06:3507:36दिन
सूर्य07:3608:37दिन
शुक्र08:3709:37दिन
बुध09:3710:38दिन
चंद्र10:3811:38दिन
शनि11:3812:39दिन
गुरु12:3913:40दिन
मंगल13:4014:40दिन
सूर्य14:4015:41दिन
शुक्र15:4116:41दिन
बुध16:4117:42दिन
चंद्र17:4218:41रात
शनि18:4119:41रात
गुरु19:4120:40रात
मंगल20:4021:40रात
सूर्य21:4022:39रात
शुक्र22:3923:38रात
बुध23:3800:38रात
चंद्र00:3801:37रात
शनि01:3702:37रात
गुरु02:3703:36रात
मंगल03:3604:36रात
सूर्य04:3605:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां कटक में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2444° (लाहिड़ी)। समय कटक (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।