10 अक्टूबर 2027 को कटक का पंचांग

रविवार, 10 अक्टूबर 2027, कटक, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 10 अक्टूबर 2027 को कटक में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (11:41 तक), नक्षत्र श्रवण (13:25 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:39 पर और सूर्यास्त 17:27 पर है। राहुकाल 15:58 से 17:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:39 – 17:27
रात 05:40 तक
तिथि
दशमी, 11:41 तक
एकादशी
नक्षत्र
श्रवण, 13:25 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल दशमी 11:41 तक
शुक्ल एकादशी 14:09, 11 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 13:25 तक
धनिष्ठा 16:21, 11 अक्टू॰ तक
योग
धृति 14:54 तक
शूलअशुभ 15:45, 11 अक्टू॰ तक
करण
गर 11:41 तक
वणिज 00:57, 11 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 14:09, 11 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मकर 02:55, 11 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:39
सूर्यास्त
17:27
चंद्रोदय
14:15
चंद्रास्त
01:02
दिनमान
11h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:51
अभिजीत मुहूर्त
11:09 – 11:57

अशुभ समय

राहुकाल
15:58 – 17:27
यमगंड
11:33 – 13:01
गुलिक काल
14:30 – 15:58

10 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:39 – 07:08टालें
चर07:08 – 08:36सामान्य
लाभ08:36 – 10:05शुभ
अमृत10:05 – 11:33शुभ
काल11:33 – 13:01टालें
शुभ13:01 – 14:30शुभ
रोग14:30 – 15:58टालें
उद्वेग15:58 – 17:27टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:27 – 18:58शुभ
अमृत18:58 – 20:30शुभ
चर20:30 – 22:01सामान्य
रोग22:01 – 23:33टालें
काल23:33 – 01:05टालें
लाभ01:05 – 02:36शुभ
उद्वेग02:36 – 04:08टालें
शुभ04:08 – 05:40शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3906:38दिन
शुक्र06:3807:37दिन
बुध07:3708:36दिन
चंद्र08:3609:35दिन
शनि09:3510:34दिन
गुरु10:3411:33दिन
मंगल11:3312:32दिन
सूर्य12:3213:31दिन
शुक्र13:3114:30दिन
बुध14:3015:29दिन
चंद्र15:2916:28दिन
शनि16:2817:27दिन
गुरु17:2718:28रात
मंगल18:2819:29रात
सूर्य19:2920:30रात
शुक्र20:3021:31रात
बुध21:3122:32रात
चंद्र22:3223:33रात
शनि23:3300:34रात
गुरु00:3401:35रात
मंगल01:3502:36रात
सूर्य02:3603:37रात
शुक्र03:3704:39रात
बुध04:3905:40रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कटक में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2450° (लाहिड़ी)। समय कटक (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।