28 अगस्त 2028 को कटक का पंचांग

सोमवार, 28 अगस्त 2028, कटक, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 28 अगस्त 2028 को कटक में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (18:50 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (19:46 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:29 पर और सूर्यास्त 18:05 पर है। राहुकाल 07:04 से 08:38 तक है।

दिन और रात
दिन 05:29 – 18:05
रात 05:29 तक
तिथि
नवमी, 18:50 तक
दशमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 19:46 तक
मूल
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 अगस्त 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल नवमी 18:50 तक
शुक्ल दशमी 19:31, 29 अग॰ तक
नक्षत्र
मूल 21:08, 29 अग॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 22:55 तक
प्रीति 22:31, 29 अग॰ तक
करण
बालव 06:44 तक
कौलव 18:50 तक
तैतिल 07:06, 29 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:29
सूर्यास्त
18:05
चंद्रोदय
13:19
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:58 – 04:44
अभिजीत मुहूर्त
11:22 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
07:04 – 08:38
यमगंड
10:13 – 11:47
गुलिक काल
13:21 – 14:56

28 अगस्त 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:29 – 07:04शुभ
काल07:04 – 08:38टालें
शुभ08:38 – 10:13शुभ
रोग10:13 – 11:47टालें
उद्वेग11:47 – 13:21टालें
चर13:21 – 14:56सामान्य
लाभ14:56 – 16:30शुभ
अमृत16:30 – 18:05शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:05 – 19:30सामान्य
रोग19:30 – 20:56टालें
काल20:56 – 22:22टालें
लाभ22:22 – 23:47शुभ
उद्वेग23:47 – 01:13टालें
शुभ01:13 – 02:38शुभ
अमृत02:38 – 04:04शुभ
चर04:04 – 05:29सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2906:32दिन
शनि06:3207:35दिन
गुरु07:3508:38दिन
मंगल08:3809:41दिन
सूर्य09:4110:44दिन
शुक्र10:4411:47दिन
बुध11:4712:50दिन
चंद्र12:5013:53दिन
शनि13:5314:56दिन
गुरु14:5615:59दिन
मंगल15:5917:02दिन
सूर्य17:0218:05दिन
शुक्र18:0519:02रात
बुध19:0219:59रात
चंद्र19:5920:56रात
शनि20:5621:53रात
गुरु21:5322:50रात
मंगल22:5023:47रात
सूर्य23:4700:44रात
शुक्र00:4401:41रात
बुध01:4102:38रात
चंद्र02:3803:35रात
शनि03:3504:32रात
गुरु04:3205:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 अग॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 सित॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 सित॰ 2028भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
8 सित॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 सित॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 सित॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 सित॰ 2028कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 सित॰ 2028आश्विन अमावस्याअमावस्या
22 सित॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कटक में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2574° (लाहिड़ी)। समय कटक (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।