24 अक्टूबर 2029 को कटक का पंचांग

बुधवार, 24 अक्टूबर 2029, कटक, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 24 अक्टूबर 2029 को कटक में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (20:04 तक), नक्षत्र भरणी (10:53 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:44 पर और सूर्यास्त 17:16 पर है। राहुकाल 11:30 से 12:56 तक है।

दिन और रात
दिन 05:44 – 17:16
रात 05:45 तक
तिथि
द्वितीया, 20:04 तक
तृतीया
नक्षत्र
भरणी, 10:53 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 20:04 तक
कृष्ण तृतीया 22:34, 25 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
भरणी 10:53 तक
कृत्तिका 13:54, 25 अक्टू॰ तक
योग
सिद्धि 10:37 तक
व्यतीपातअशुभ 11:32, 25 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 06:47 तक
गर 20:04 तक
वणिज 09:20, 25 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मेष 17:39 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:44
सूर्यास्त
17:16
चंद्रोदय
18:26
चंद्रास्त
07:10
दिनमान
11h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:05 – 04:55
अभिजीत मुहूर्त
11:07 – 11:53 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:30 – 12:56
यमगंड
07:11 – 08:37
गुलिक काल
10:04 – 11:30

24 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:44 – 07:11शुभ
अमृत07:11 – 08:37शुभ
काल08:37 – 10:04टालें
शुभ10:04 – 11:30शुभ
रोग11:30 – 12:56टालें
उद्वेग12:56 – 14:23टालें
चर14:23 – 15:49सामान्य
लाभ15:49 – 17:16शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:16 – 18:49टालें
शुभ18:49 – 20:23शुभ
अमृत20:23 – 21:57शुभ
चर21:57 – 23:30सामान्य
रोग23:30 – 01:04टालें
काल01:04 – 02:38टालें
लाभ02:38 – 04:11शुभ
उद्वेग04:11 – 05:45टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4406:42दिन
चंद्र06:4207:40दिन
शनि07:4008:37दिन
गुरु08:3709:35दिन
मंगल09:3510:32दिन
सूर्य10:3211:30दिन
शुक्र11:3012:28दिन
बुध12:2813:25दिन
चंद्र13:2514:23दिन
शनि14:2315:20दिन
गुरु15:2016:18दिन
मंगल16:1817:16दिन
सूर्य17:1618:18रात
शुक्र18:1819:21रात
बुध19:2120:23रात
चंद्र20:2321:25रात
शनि21:2522:28रात
गुरु22:2823:30रात
मंगल23:3000:33रात
सूर्य00:3301:35रात
शुक्र01:3502:38रात
बुध02:3803:40रात
चंद्र03:4004:42रात
शनि04:4205:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां कटक में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2735° (लाहिड़ी)। समय कटक (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।