5 सितंबर 2025 को दावणगेरे का पंचांग

शुक्रवार, 5 सितंबर 2025, दावणगेरे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 5 सितंबर 2025 को दावणगेरे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (03:13, 6 सित॰ तक), नक्षत्र श्रवण (23:38 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:14 पर और सूर्यास्त 18:35 पर है। राहुकाल 10:52 से 12:24 तक है।

दिन और रात
दिन 06:14 – 18:35
रात 06:14 तक
तिथि
त्रयोदशी, 03:13 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
श्रवण, 23:38 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 सितंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 03:13, 6 सित॰ तक
शुक्ल चतुर्दशी 01:41, 7 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 23:38 तक
धनिष्ठा 22:55, 6 सित॰ तक
योग
शोभन 13:52 तक
अतिगंडअशुभ 11:51, 6 सित॰ तक
करण
कौलव 15:46 तक
तैतिल 03:13, 6 सित॰ तक
गर 14:31, 6 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:14
सूर्यास्त
18:35
चंद्रोदय
16:57
चंद्रास्त
03:43
दिनमान
12h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:41 – 05:28
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:49

अशुभ समय

राहुकाल
10:52 – 12:24
यमगंड
15:30 – 17:02
गुलिक काल
07:47 – 09:19

5 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:14 – 07:47सामान्य
लाभ07:47 – 09:19शुभ
अमृत09:19 – 10:52शुभ
काल10:52 – 12:24टालें
शुभ12:24 – 13:57शुभ
रोग13:57 – 15:30टालें
उद्वेग15:30 – 17:02टालें
चर17:02 – 18:35सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:35 – 20:02टालें
काल20:02 – 21:30टालें
लाभ21:30 – 22:57शुभ
उद्वेग22:57 – 00:24टालें
शुभ00:24 – 01:52शुभ
अमृत01:52 – 03:19शुभ
चर03:19 – 04:47सामान्य
रोग04:47 – 06:14टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:1407:16दिन
बुध07:1608:18दिन
चंद्र08:1809:19दिन
शनि09:1910:21दिन
गुरु10:2111:23दिन
मंगल11:2312:24दिन
सूर्य12:2413:26दिन
शुक्र13:2614:28दिन
बुध14:2815:30दिन
चंद्र15:3016:31दिन
शनि16:3117:33दिन
गुरु17:3318:35दिन
मंगल18:3519:33रात
सूर्य19:3320:31रात
शुक्र20:3121:30रात
बुध21:3022:28रात
चंद्र22:2823:26रात
शनि23:2600:24रात
गुरु00:2401:23रात
मंगल01:2302:21रात
सूर्य02:2103:19रात
शुक्र03:1904:18रात
बुध04:1805:16रात
चंद्र05:1606:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
26 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां दावणगेरे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2158° (लाहिड़ी)। समय दावणगेरे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।