11 मार्च 2026 को देवघर का पंचांग

बुधवार, 11 मार्च 2026, देवघर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 11 मार्च 2026 को देवघर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (04:19, 12 मार्च तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (22:00 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 17:50 पर है। राहुकाल 11:53 से 13:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 17:50
रात 05:55 तक
तिथि
अष्टमी, 04:19 तक
नवमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 22:00 तक
मूल
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 मार्च 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 04:19, 12 मार्च तक
कृष्ण नवमी 06:29, 13 मार्च तक
नक्षत्र
मूल 00:43, 13 मार्च तक
योग
वज्रअशुभ 09:12 तक
सिद्धि 09:58, 12 मार्च तक
करण
बालव 15:08 तक
कौलव 04:19, 12 मार्च तक
तैतिल 17:27, 12 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
17:50
चंद्रोदय
00:10
चंद्रास्त
10:39
दिनमान
11h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
11:29 – 12:17 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:53 – 13:22
यमगंड
07:25 – 08:54
गुलिक काल
10:24 – 11:53

11 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:56 – 07:25शुभ
अमृत07:25 – 08:54शुभ
काल08:54 – 10:24टालें
शुभ10:24 – 11:53शुभ
रोग11:53 – 13:22टालें
उद्वेग13:22 – 14:51टालें
चर14:51 – 16:21सामान्य
लाभ16:21 – 17:50शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:50 – 19:20टालें
शुभ19:20 – 20:51शुभ
अमृत20:51 – 22:22शुभ
चर22:22 – 23:52सामान्य
रोग23:52 – 01:23टालें
काल01:23 – 02:54टालें
लाभ02:54 – 04:24शुभ
उद्वेग04:24 – 05:55टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5606:56दिन
चंद्र06:5607:55दिन
शनि07:5508:54दिन
गुरु08:5409:54दिन
मंगल09:5410:53दिन
सूर्य10:5311:53दिन
शुक्र11:5312:52दिन
बुध12:5213:52दिन
चंद्र13:5214:51दिन
शनि14:5115:51दिन
गुरु15:5116:50दिन
मंगल16:5017:50दिन
सूर्य17:5018:50रात
शुक्र18:5019:51रात
बुध19:5120:51रात
चंद्र20:5121:52रात
शनि21:5222:52रात
गुरु22:5223:52रात
मंगल23:5200:53रात
सूर्य00:5301:53रात
शुक्र01:5302:54रात
बुध02:5403:54रात
चंद्र03:5404:55रात
शनि04:5505:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 मार्च 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 मार्च 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मार्च 2026मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्च 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 मार्च 2026चैत्र अमावस्याअमावस्या
22 मार्च 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
6 अप्रैल 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां देवघर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2229° (लाहिड़ी)। समय देवघर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।