16 अगस्त 2025 को दोहा का पंचांग

शनिवार, 16 अगस्त 2025, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

शनिवार, 16 अगस्त 2025 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (19:05 तक), नक्षत्र कृत्तिका (02:08, 17 अग॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:07 पर और सूर्यास्त 18:07 पर है। राहुकाल 08:22 से 10:00 तक है।

दिन और रात
दिन 05:07 – 18:07
रात 05:08 तक
तिथि
अष्टमी, 19:05 तक
नवमी
नक्षत्र
कृत्तिका, 02:08 तक
रोहिणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 अगस्त 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 19:05 तक
कृष्ण नवमी 16:54, 17 अग॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 02:08, 17 अग॰ तक
रोहिणी 00:47, 18 अग॰ तक
योग
ध्रुव 01:58, 17 अग॰ तक
व्याघातअशुभ 23:10, 17 अग॰ तक
करण
बालव 08:12 तक
कौलव 19:05 तक
तैतिल 05:59, 17 अग॰ तक
चंद्र राशि
मेष 09:13 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:07
सूर्यास्त
18:07
चंद्रोदय
22:57
चंद्रास्त
12:11
दिनमान
13h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:40 – 04:24
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 12:03

अशुभ समय

राहुकाल
08:22 – 10:00
यमगंड
13:15 – 14:52
गुलिक काल
05:07 – 06:45

16 अगस्त 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:07 – 06:45टालें
शुभ06:45 – 08:22शुभ
रोग08:22 – 10:00टालें
उद्वेग10:00 – 11:37टालें
चर11:37 – 13:15सामान्य
लाभ13:15 – 14:52शुभ
अमृत14:52 – 16:30शुभ
काल16:30 – 18:07टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:07 – 19:30शुभ
उद्वेग19:30 – 20:53टालें
शुभ20:53 – 22:15शुभ
अमृत22:15 – 23:38शुभ
चर23:38 – 01:00सामान्य
रोग01:00 – 02:23टालें
काल02:23 – 03:45टालें
लाभ03:45 – 05:08शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:0706:12दिन
गुरु06:1207:17दिन
मंगल07:1708:22दिन
सूर्य08:2209:27दिन
शुक्र09:2710:32दिन
बुध10:3211:37दिन
चंद्र11:3712:42दिन
शनि12:4213:47दिन
गुरु13:4714:52दिन
मंगल14:5215:57दिन
सूर्य15:5717:02दिन
शुक्र17:0218:07दिन
बुध18:0719:03रात
चंद्र19:0319:58रात
शनि19:5820:53रात
गुरु20:5321:48रात
मंगल21:4822:43रात
सूर्य22:4323:38रात
शुक्र23:3800:33रात
बुध00:3301:28रात
चंद्र01:2802:23रात
शनि02:2303:18रात
गुरु03:1804:13रात
मंगल04:1305:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 अग॰ 2025भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
27 अग॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 सित॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2150° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।