12 सितंबर 2025 को दोहा का पंचांग

शुक्रवार, 12 सितंबर 2025, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

शुक्रवार, 12 सितंबर 2025 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (07:29 तक), नक्षत्र भरणी (09:28 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:18 पर और सूर्यास्त 17:41 पर है। राहुकाल 09:57 से 11:29 तक है।

दिन और रात
दिन 05:18 – 17:41
रात 05:19 तक
तिथि
षष्ठी, 04:53 तक
नक्षत्र
भरणी, 09:28 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 सितंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 07:29 तक
कृष्ण षष्ठी 04:53, 13 सित॰ तक
कृष्ण सप्तमी 02:34, 14 सित॰ तक
नक्षत्र
भरणी 09:28 तक
कृत्तिका 07:41, 13 सित॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 11:13 तक
हर्षण 08:02, 13 सित॰ तक
करण
तैतिल 07:29 तक
गर 18:09 तक
वणिज 04:53, 13 सित॰ तक
विष्टि (भद्रा) 15:41, 13 सित॰ तक
चंद्र राशि
मेष 15:00 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:18
सूर्यास्त
17:41
चंद्रोदय
20:54
चंद्रास्त
10:02
दिनमान
12h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:45 – 04:32
अभिजीत मुहूर्त
11:05 – 11:54

अशुभ समय

राहुकाल
09:57 – 11:29
यमगंड
14:35 – 16:08
गुलिक काल
06:51 – 08:24

12 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:18 – 06:51सामान्य
लाभ06:51 – 08:24शुभ
अमृत08:24 – 09:57शुभ
काल09:57 – 11:29टालें
शुभ11:29 – 13:02शुभ
रोग13:02 – 14:35टालें
उद्वेग14:35 – 16:08टालें
चर16:08 – 17:41सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:41 – 19:08टालें
काल19:08 – 20:35टालें
लाभ20:35 – 22:02शुभ
उद्वेग22:02 – 23:30टालें
शुभ23:30 – 00:57शुभ
अमृत00:57 – 02:24शुभ
चर02:24 – 03:51सामान्य
रोग03:51 – 05:19टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:1806:20दिन
बुध06:2007:22दिन
चंद्र07:2208:24दिन
शनि08:2409:26दिन
गुरु09:2610:28दिन
मंगल10:2811:29दिन
सूर्य11:2912:31दिन
शुक्र12:3113:33दिन
बुध13:3314:35दिन
चंद्र14:3515:37दिन
शनि15:3716:39दिन
गुरु16:3917:41दिन
मंगल17:4118:39रात
सूर्य18:3919:37रात
शुक्र19:3720:35रात
बुध20:3521:33रात
चंद्र21:3322:31रात
शनि22:3123:30रात
गुरु23:3000:28रात
मंगल00:2801:26रात
सूर्य01:2602:24रात
शुक्र02:2403:22रात
बुध03:2204:20रात
चंद्र04:2005:19रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
25 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2160° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।