3 अक्टूबर 2025 को दोहा का पंचांग

शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2025, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2025 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (16:03 तक), नक्षत्र श्रवण (07:04 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:26 पर और सूर्यास्त 17:18 पर है। राहुकाल 09:53 से 11:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:26 – 17:18
रात 05:27 तक
तिथि
एकादशी, 16:03 तक
द्वादशी
नक्षत्र
धनिष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 16:03 तक
शुक्ल द्वादशी 14:39, 4 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 07:04 तक
धनिष्ठा 06:39, 4 अक्टू॰ तक
योग
धृति 19:15 तक
शूलअशुभ 16:56, 4 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 16:03 तक
बव 03:27, 4 अक्टू॰ तक
बालव 14:39, 4 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मकर 18:57 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:26
सूर्यास्त
17:18
चंद्रोदय
14:57
चंद्रास्त
01:18
दिनमान
11h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:49 – 04:38
अभिजीत मुहूर्त
10:58 – 11:46

अशुभ समय

राहुकाल
09:53 – 11:22
यमगंड
14:20 – 15:49
गुलिक काल
06:55 – 08:24

3 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:26 – 06:55सामान्य
लाभ06:55 – 08:24शुभ
अमृत08:24 – 09:53शुभ
काल09:53 – 11:22टालें
शुभ11:22 – 12:51शुभ
रोग12:51 – 14:20टालें
उद्वेग14:20 – 15:49टालें
चर15:49 – 17:18सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:18 – 18:49टालें
काल18:49 – 20:20टालें
लाभ20:20 – 21:51शुभ
उद्वेग21:51 – 23:22टालें
शुभ23:22 – 00:54शुभ
अमृत00:54 – 02:25शुभ
चर02:25 – 03:56सामान्य
रोग03:56 – 05:27टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:2606:26दिन
बुध06:2607:25दिन
चंद्र07:2508:24दिन
शनि08:2409:24दिन
गुरु09:2410:23दिन
मंगल10:2311:22दिन
सूर्य11:2212:22दिन
शुक्र12:2213:21दिन
बुध13:2114:20दिन
चंद्र14:2015:19दिन
शनि15:1916:19दिन
गुरु16:1917:18दिन
मंगल17:1818:19रात
सूर्य18:1919:19रात
शुक्र19:1920:20रात
बुध20:2021:21रात
चंद्र21:2122:22रात
शनि22:2223:22रात
गुरु23:2200:23रात
मंगल00:2301:24रात
सूर्य01:2402:25रात
शुक्र02:2503:25रात
बुध03:2504:26रात
चंद्र04:2605:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2168° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।