8 अक्टूबर 2025 को दोहा का पंचांग

बुधवार, 8 अक्टूबर 2025, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

बुधवार, 8 अक्टूबर 2025 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (23:53 तक), नक्षत्र अश्विनी (20:14 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:29 पर और सूर्यास्त 17:13 पर है। राहुकाल 11:21 से 12:49 तक है।

दिन और रात
दिन 05:29 – 17:13
रात 05:29 तक
तिथि
द्वितीया, 23:53 तक
तृतीया
नक्षत्र
अश्विनी, 20:14 तक
भरणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 23:53 तक
कृष्ण तृतीया 20:24, 9 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
भरणी 17:32, 9 अक्टू॰ तक
योग
हर्षण 23:02 तक
वज्रअशुभ 19:02, 9 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 13:38 तक
गर 23:53 तक
वणिज 10:08, 9 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:29
सूर्यास्त
17:13
चंद्रोदय
18:00
चंद्रास्त
06:35
दिनमान
11h 44m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
10:57 – 11:44 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:21 – 12:49
यमगंड
06:57 – 08:25
गुलिक काल
09:53 – 11:21

8 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:29 – 06:57शुभ
अमृत06:57 – 08:25शुभ
काल08:25 – 09:53टालें
शुभ09:53 – 11:21शुभ
रोग11:21 – 12:49टालें
उद्वेग12:49 – 14:17टालें
चर14:17 – 15:45सामान्य
लाभ15:45 – 17:13शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:13 – 18:45टालें
शुभ18:45 – 20:17शुभ
अमृत20:17 – 21:49शुभ
चर21:49 – 23:21सामान्य
रोग23:21 – 00:53टालें
काल00:53 – 02:25टालें
लाभ02:25 – 03:57शुभ
उद्वेग03:57 – 05:29टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:2906:27दिन
चंद्र06:2707:26दिन
शनि07:2608:25दिन
गुरु08:2509:23दिन
मंगल09:2310:22दिन
सूर्य10:2211:21दिन
शुक्र11:2112:19दिन
बुध12:1913:18दिन
चंद्र13:1814:17दिन
शनि14:1715:16दिन
गुरु15:1616:14दिन
मंगल16:1417:13दिन
सूर्य17:1318:14रात
शुक्र18:1419:16रात
बुध19:1620:17रात
चंद्र20:1721:18रात
शनि21:1822:20रात
गुरु22:2023:21रात
मंगल23:2100:22रात
सूर्य00:2201:24रात
शुक्र01:2402:25रात
बुध02:2503:26रात
चंद्र03:2604:28रात
शनि04:2805:29रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2170° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।