26 दिसंबर 2025 को दोहा का पंचांग

शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (11:14 तक), नक्षत्र शतभिषा (06:30 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:17 पर और सूर्यास्त 16:51 पर है। राहुकाल 10:15 से 11:34 तक है।

दिन और रात
दिन 06:17 – 16:51
रात 06:17 तक
तिथि
षष्ठी, 11:14 तक
सप्तमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 11:14 तक
शुक्ल सप्तमी 10:40, 27 दिस॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 06:30 तक
पूर्वा भाद्रपद 06:39, 27 दिस॰ तक
योग
सिद्धि 11:31 तक
व्यतीपातअशुभ 09:51, 27 दिस॰ तक
करण
तैतिल 11:14 तक
गर 23:01 तक
वणिज 10:40, 27 दिस॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 00:40, 27 दिस॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:17
सूर्यास्त
16:51
चंद्रोदय
10:32
चंद्रास्त
22:40
दिनमान
10h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:29 – 05:23
अभिजीत मुहूर्त
11:13 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
10:15 – 11:34
यमगंड
14:13 – 15:32
गुलिक काल
07:36 – 08:55

26 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:17 – 07:36सामान्य
लाभ07:36 – 08:55शुभ
अमृत08:55 – 10:15शुभ
काल10:15 – 11:34टालें
शुभ11:34 – 12:53शुभ
रोग12:53 – 14:13टालें
उद्वेग14:13 – 15:32टालें
चर15:32 – 16:51सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग16:51 – 18:32टालें
काल18:32 – 20:13टालें
लाभ20:13 – 21:53शुभ
उद्वेग21:53 – 23:34टालें
शुभ23:34 – 01:15शुभ
अमृत01:15 – 02:56शुभ
चर02:56 – 04:36सामान्य
रोग04:36 – 06:17टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:1707:10दिन
बुध07:1008:03दिन
चंद्र08:0308:55दिन
शनि08:5509:48दिन
गुरु09:4810:41दिन
मंगल10:4111:34दिन
सूर्य11:3412:27दिन
शुक्र12:2713:20दिन
बुध13:2014:13दिन
चंद्र14:1315:05दिन
शनि15:0515:58दिन
गुरु15:5816:51दिन
मंगल16:5117:58रात
सूर्य17:5819:05रात
शुक्र19:0520:13रात
बुध20:1321:20रात
चंद्र21:2022:27रात
शनि22:2723:34रात
गुरु23:3400:41रात
मंगल00:4101:49रात
सूर्य01:4902:56रात
शुक्र02:5604:03रात
बुध04:0305:10रात
चंद्र05:1006:17रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा
6 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 जन॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2200° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।