29 दिसंबर 2025 को दोहा का पंचांग

सोमवार, 29 दिसंबर 2025, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

सोमवार, 29 दिसंबर 2025 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (07:42 तक), नक्षत्र अश्विनी (03:34, 30 दिस॰ तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:18 पर और सूर्यास्त 16:53 पर है। राहुकाल 07:37 से 08:57 तक है।

दिन और रात
दिन 06:18 – 16:53
रात 06:18 तक
तिथि
दशमी, 05:21 तक
नक्षत्र
अश्विनी, 03:34 तक
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल नवमी 07:42 तक
शुक्ल दशमी 05:21, 30 दिस॰ तक
शुक्ल एकादशी 02:31, 31 दिस॰ तक
नक्षत्र
अश्विनी 03:34, 30 दिस॰ तक
भरणी 01:28, 31 दिस॰ तक
योग
शिव 02:01, 30 दिस॰ तक
सिद्ध 22:32, 30 दिस॰ तक
करण
कौलव 07:42 तक
तैतिल 18:36 तक
गर 05:21, 30 दिस॰ तक
वणिज 15:59, 30 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:18
सूर्यास्त
16:53
चंद्रोदय
12:14
चंद्रास्त
00:39
दिनमान
10h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:31 – 05:24
अभिजीत मुहूर्त
11:14 – 11:57

अशुभ समय

राहुकाल
07:37 – 08:57
यमगंड
10:16 – 11:35
गुलिक काल
12:55 – 14:14

29 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:18 – 07:37शुभ
काल07:37 – 08:57टालें
शुभ08:57 – 10:16शुभ
रोग10:16 – 11:35टालें
उद्वेग11:35 – 12:55टालें
चर12:55 – 14:14सामान्य
लाभ14:14 – 15:34शुभ
अमृत15:34 – 16:53शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर16:53 – 18:34सामान्य
रोग18:34 – 20:14टालें
काल20:14 – 21:55टालें
लाभ21:55 – 23:36शुभ
उद्वेग23:36 – 01:16टालें
शुभ01:16 – 02:57शुभ
अमृत02:57 – 04:38शुभ
चर04:38 – 06:18सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:1807:11दिन
शनि07:1108:04दिन
गुरु08:0408:57दिन
मंगल08:5709:50दिन
सूर्य09:5010:43दिन
शुक्र10:4311:35दिन
बुध11:3512:28दिन
चंद्र12:2813:21दिन
शनि13:2114:14दिन
गुरु14:1415:07दिन
मंगल15:0716:00दिन
सूर्य16:0016:53दिन
शुक्र16:5318:00रात
बुध18:0019:07रात
चंद्र19:0720:14रात
शनि20:1421:21रात
गुरु21:2122:29रात
मंगल22:2923:36रात
सूर्य23:3600:43रात
शुक्र00:4301:50रात
बुध01:5002:57रात
चंद्र02:5704:04रात
शनि04:0405:11रात
गुरु05:1106:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा
6 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 जन॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2202° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।