13 मार्च 2026 को दोहा का पंचांग

शुक्रवार, 13 मार्च 2026, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

शुक्रवार, 13 मार्च 2026 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (05:41, 14 मार्च तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (00:33, 14 मार्च तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:45 पर और सूर्यास्त 17:41 पर है। राहुकाल 10:13 से 11:43 तक है।

दिन और रात
दिन 05:45 – 17:41
रात 05:44 तक
तिथि
दशमी, 05:41 तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 00:33 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 मार्च 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण दशमी 05:41, 14 मार्च तक
कृष्ण एकादशी 06:47, 15 मार्च तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 00:33, 14 मार्च तक
उत्तराषाढ़ा 02:19, 15 मार्च तक
योग
व्यतीपातअशुभ 08:01 तक
वरीयान 08:12, 14 मार्च तक
करण
वणिज 16:54 तक
विष्टि (भद्रा) 05:41, 14 मार्च तक
बव 18:19, 14 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:45
सूर्यास्त
17:41
चंद्रोदय
01:51
चंद्रास्त
12:19
दिनमान
11h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:08 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
11:19 – 12:07

अशुभ समय

राहुकाल
10:13 – 11:43
यमगंड
14:42 – 16:12
गुलिक काल
07:14 – 08:44

13 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:45 – 07:14सामान्य
लाभ07:14 – 08:44शुभ
अमृत08:44 – 10:13शुभ
काल10:13 – 11:43टालें
शुभ11:43 – 13:13शुभ
रोग13:13 – 14:42टालें
उद्वेग14:42 – 16:12टालें
चर16:12 – 17:41सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:41 – 19:12टालें
काल19:12 – 20:42टालें
लाभ20:42 – 22:12शुभ
उद्वेग22:12 – 23:43टालें
शुभ23:43 – 01:13शुभ
अमृत01:13 – 02:43शुभ
चर02:43 – 04:13सामान्य
रोग04:13 – 05:44टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4506:45दिन
बुध06:4507:44दिन
चंद्र07:4408:44दिन
शनि08:4409:44दिन
गुरु09:4410:43दिन
मंगल10:4311:43दिन
सूर्य11:4312:43दिन
शुक्र12:4313:42दिन
बुध13:4214:42दिन
चंद्र14:4215:42दिन
शनि15:4216:42दिन
गुरु16:4217:41दिन
मंगल17:4118:41रात
सूर्य18:4119:42रात
शुक्र19:4220:42रात
बुध20:4221:42रात
चंद्र21:4222:42रात
शनि22:4223:43रात
गुरु23:4300:43रात
मंगल00:4301:43रात
सूर्य01:4302:43रात
शुक्र02:4303:43रात
बुध03:4304:44रात
चंद्र04:4405:44रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 मार्च 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 मार्च 2026मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्च 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 मार्च 2026चैत्र अमावस्याअमावस्या
22 मार्च 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
6 अप्रैल 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अप्रैल 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2230° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।