23 सितंबर 2026 को दोहा का पंचांग

बुधवार, 23 सितंबर 2026, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

बुधवार, 23 सितंबर 2026 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (20:20 तक), नक्षत्र श्रवण (06:39 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:22 पर और सूर्यास्त 17:29 पर है। राहुकाल 11:26 से 12:56 तक है।

दिन और रात
दिन 05:22 – 17:29
रात 05:23 तक
तिथि
द्वादशी, 20:20 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
धनिष्ठा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 सितंबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 20:20 तक
शुक्ल त्रयोदशी 20:48, 24 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 06:39 तक
धनिष्ठा 08:05, 24 सित॰ तक
योग
सुकर्मा 13:57 तक
धृति 13:24, 24 सित॰ तक
करण
बव 07:52 तक
बालव 20:20 तक
कौलव 08:39, 24 सित॰ तक
चंद्र राशि
मकर 19:27 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:22
सूर्यास्त
17:29
चंद्रोदय
15:32
चंद्रास्त
02:04
दिनमान
12h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:47 – 04:35
अभिजीत मुहूर्त
11:01 – 11:50 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:26 – 12:56
यमगंड
06:53 – 08:24
गुलिक काल
09:55 – 11:26

23 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:22 – 06:53शुभ
अमृत06:53 – 08:24शुभ
काल08:24 – 09:55टालें
शुभ09:55 – 11:26शुभ
रोग11:26 – 12:56टालें
उद्वेग12:56 – 14:27टालें
चर14:27 – 15:58सामान्य
लाभ15:58 – 17:29शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:29 – 18:58टालें
शुभ18:58 – 20:27शुभ
अमृत20:27 – 21:57शुभ
चर21:57 – 23:26सामान्य
रोग23:26 – 00:55टालें
काल00:55 – 02:24टालें
लाभ02:24 – 03:53शुभ
उद्वेग03:53 – 05:23टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:2206:23दिन
चंद्र06:2307:23दिन
शनि07:2308:24दिन
गुरु08:2409:25दिन
मंगल09:2510:25दिन
सूर्य10:2511:26दिन
शुक्र11:2612:26दिन
बुध12:2613:27दिन
चंद्र13:2714:27दिन
शनि14:2715:28दिन
गुरु15:2816:28दिन
मंगल16:2817:29दिन
सूर्य17:2918:28रात
शुक्र18:2819:28रात
बुध19:2820:27रात
चंद्र20:2721:27रात
शनि21:2722:26रात
गुरु22:2623:26रात
मंगल23:2600:25रात
सूर्य00:2501:25रात
शुक्र01:2502:24रात
बुध02:2403:24रात
चंद्र03:2404:23रात
शनि04:2305:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2304° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।