22 अक्टूबर 2026 को दोहा का पंचांग

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (12:18 तक), नक्षत्र शतभिषा (18:19 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:35 पर और सूर्यास्त 17:00 पर है। राहुकाल 12:43 से 14:09 तक है।

दिन और रात
दिन 05:35 – 17:00
रात 05:36 तक
तिथि
एकादशी, 12:18 तक
द्वादशी
नक्षत्र
शतभिषा, 18:19 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 12:18 तक
शुक्ल द्वादशी 12:06, 23 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 18:19 तक
पूर्वा भाद्रपद 18:33, 23 अक्टू॰ तक
योग
वृद्धि 21:09 तक
ध्रुव 19:38, 23 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 12:18 तक
बव 00:18, 23 अक्टू॰ तक
बालव 12:06, 23 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:35
सूर्यास्त
17:00
चंद्रोदय
14:34
चंद्रास्त
01:42
दिनमान
11h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:55 – 04:45
अभिजीत मुहूर्त
10:55 – 11:41

अशुभ समय

राहुकाल
12:43 – 14:09
यमगंड
05:35 – 07:01
गुलिक काल
08:26 – 09:52

22 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:35 – 07:01शुभ
रोग07:01 – 08:26टालें
उद्वेग08:26 – 09:52टालें
चर09:52 – 11:18सामान्य
लाभ11:18 – 12:43शुभ
अमृत12:43 – 14:09शुभ
काल14:09 – 15:35टालें
शुभ15:35 – 17:00शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:00 – 18:35शुभ
चर18:35 – 20:09सामान्य
रोग20:09 – 21:44टालें
काल21:44 – 23:18टालें
लाभ23:18 – 00:52शुभ
उद्वेग00:52 – 02:27टालें
शुभ02:27 – 04:01शुभ
अमृत04:01 – 05:36शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:3506:32दिन
मंगल06:3207:29दिन
सूर्य07:2908:26दिन
शुक्र08:2609:24दिन
बुध09:2410:21दिन
चंद्र10:2111:18दिन
शनि11:1812:15दिन
गुरु12:1513:12दिन
मंगल13:1214:09दिन
सूर्य14:0915:06दिन
शुक्र15:0616:03दिन
बुध16:0317:00दिन
चंद्र17:0018:03रात
शनि18:0319:06रात
गुरु19:0620:09रात
मंगल20:0921:12रात
सूर्य21:1222:15रात
शुक्र22:1523:18रात
बुध23:1800:21रात
चंद्र00:2101:24रात
शनि01:2402:27रात
गुरु02:2703:30रात
मंगल03:3004:33रात
सूर्य04:3305:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2315° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।