3 नवंबर 2026 को दोहा का पंचांग

मंगलवार, 3 नवंबर 2026, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (09:25 तक), नक्षत्र मघा (00:56, 4 नव॰ तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:42 पर और सूर्यास्त 16:51 पर है। राहुकाल 14:04 से 15:28 तक है।

दिन और रात
दिन 05:42 – 16:51
रात 05:43 तक
तिथि
नवमी, 09:25 तक
दशमी
नक्षत्र
मघा, 00:56 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 नवंबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण नवमी 09:25 तक
कृष्ण दशमी 08:33, 4 नव॰ तक
नक्षत्र
मघा 00:56, 4 नव॰ तक
योग
शुक्ल 07:24 तक
ब्रह्म 05:31, 4 नव॰ तक
इंद्र 03:56, 5 नव॰ तक
करण
गर 09:25 तक
वणिज 20:56 तक
विष्टि (भद्रा) 08:33, 4 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:42
सूर्यास्त
16:51
चंद्रोदय
00:02
चंद्रास्त
13:14
दिनमान
11h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:00 – 04:51
अभिजीत मुहूर्त
10:54 – 11:39

अशुभ समय

राहुकाल
14:04 – 15:28
यमगंड
08:30 – 09:53
गुलिक काल
11:17 – 12:40

3 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:42 – 07:06टालें
उद्वेग07:06 – 08:30टालें
चर08:30 – 09:53सामान्य
लाभ09:53 – 11:17शुभ
अमृत11:17 – 12:40शुभ
काल12:40 – 14:04टालें
शुभ14:04 – 15:28शुभ
रोग15:28 – 16:51टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल16:51 – 18:28टालें
लाभ18:28 – 20:04शुभ
उद्वेग20:04 – 21:41टालें
शुभ21:41 – 23:17शुभ
अमृत23:17 – 00:54शुभ
चर00:54 – 02:30सामान्य
रोग02:30 – 04:06टालें
काल04:06 – 05:43टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:4206:38दिन
सूर्य06:3807:34दिन
शुक्र07:3408:30दिन
बुध08:3009:25दिन
चंद्र09:2510:21दिन
शनि10:2111:17दिन
गुरु11:1712:13दिन
मंगल12:1313:08दिन
सूर्य13:0814:04दिन
शुक्र14:0415:00दिन
बुध15:0015:56दिन
चंद्र15:5616:51दिन
शनि16:5117:56रात
गुरु17:5619:00रात
मंगल19:0020:04रात
सूर्य20:0421:09रात
शुक्र21:0922:13रात
बुध22:1323:17रात
चंद्र23:1700:21रात
शनि00:2101:26रात
गुरु01:2602:30रात
मंगल02:3003:34रात
सूर्य03:3404:39रात
शुक्र04:3905:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
27 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2320° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।