18 नवंबर 2026 को दोहा का पंचांग

बुधवार, 18 नवंबर 2026, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

बुधवार, 18 नवंबर 2026 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (04:36, 19 नव॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (03:40, 19 नव॰ तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:52 पर और सूर्यास्त 16:44 पर है। राहुकाल 11:18 से 12:40 तक है।

दिन और रात
दिन 05:52 – 16:44
रात 05:53 तक
तिथि
नवमी, 04:36 तक
दशमी
नक्षत्र
शतभिषा, 03:40 तक
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 नवंबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल नवमी 04:36, 19 नव॰ तक
शुक्ल दशमी 04:46, 20 नव॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 03:40, 19 नव॰ तक
पूर्वा भाद्रपद 04:26, 20 नव॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 05:12, 19 नव॰ तक
हर्षण 04:10, 20 नव॰ तक
करण
बालव 16:12 तक
कौलव 04:36, 19 नव॰ तक
तैतिल 16:48, 19 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:52
सूर्यास्त
16:44
चंद्रोदय
12:31
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
10h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 05:00
अभिजीत मुहूर्त
10:57 – 11:40 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:18 – 12:40
यमगंड
07:14 – 08:35
गुलिक काल
09:57 – 11:18

18 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:52 – 07:14शुभ
अमृत07:14 – 08:35शुभ
काल08:35 – 09:57टालें
शुभ09:57 – 11:18शुभ
रोग11:18 – 12:40टालें
उद्वेग12:40 – 14:01टालें
चर14:01 – 15:23सामान्य
लाभ15:23 – 16:44शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग16:44 – 18:23टालें
शुभ18:23 – 20:02शुभ
अमृत20:02 – 21:40शुभ
चर21:40 – 23:19सामान्य
रोग23:19 – 00:57टालें
काल00:57 – 02:36टालें
लाभ02:36 – 04:15शुभ
उद्वेग04:15 – 05:53टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5206:47दिन
चंद्र06:4707:41दिन
शनि07:4108:35दिन
गुरु08:3509:30दिन
मंगल09:3010:24दिन
सूर्य10:2411:18दिन
शुक्र11:1812:13दिन
बुध12:1313:07दिन
चंद्र13:0714:01दिन
शनि14:0114:56दिन
गुरु14:5615:50दिन
मंगल15:5016:44दिन
सूर्य16:4417:50रात
शुक्र17:5018:56रात
बुध18:5620:02रात
चंद्र20:0221:07रात
शनि21:0722:13रात
गुरु22:1323:19रात
मंगल23:1900:24रात
सूर्य00:2401:30रात
शुक्र01:3002:36रात
बुध02:3603:42रात
चंद्र03:4204:47रात
शनि04:4705:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
27 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
13 दिस॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2026धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2325° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।