18 अप्रैल 2027 को दोहा का पंचांग

रविवार, 18 अप्रैल 2027, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

रविवार, 18 अप्रैल 2027 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (05:12 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (02:45, 19 अप्रैल तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:09 पर और सूर्यास्त 17:57 पर है। राहुकाल 16:21 से 17:57 तक है।

दिन और रात
दिन 05:09 – 17:57
रात 05:08 तक
तिथि
त्रयोदशी, 03:38 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 02:45 तक
हस्त
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 अप्रैल 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 05:12 तक
शुक्ल त्रयोदशी 03:38, 19 अप्रैल तक
शुक्ल चतुर्दशी 02:21, 20 अप्रैल तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 02:45, 19 अप्रैल तक
हस्त 02:10, 20 अप्रैल तक
योग
ध्रुव 19:28 तक
व्याघातअशुभ 17:14, 19 अप्रैल तक
करण
बालव 05:12 तक
कौलव 16:24 तक
तैतिल 03:38, 19 अप्रैल तक
गर 14:57, 19 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सिंह 09:22 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:09
सूर्यास्त
17:57
चंद्रोदय
15:39
चंद्रास्त
03:13
दिनमान
12h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:39 – 04:24
अभिजीत मुहूर्त
11:07 – 11:59

अशुभ समय

राहुकाल
16:21 – 17:57
यमगंड
11:33 – 13:09
गुलिक काल
14:45 – 16:21

18 अप्रैल 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:09 – 06:45टालें
चर06:45 – 08:21सामान्य
लाभ08:21 – 09:57शुभ
अमृत09:57 – 11:33शुभ
काल11:33 – 13:09टालें
शुभ13:09 – 14:45शुभ
रोग14:45 – 16:21टालें
उद्वेग16:21 – 17:57टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:57 – 19:21शुभ
अमृत19:21 – 20:45शुभ
चर20:45 – 22:09सामान्य
रोग22:09 – 23:33टालें
काल23:33 – 00:56टालें
लाभ00:56 – 02:20शुभ
उद्वेग02:20 – 03:44टालें
शुभ03:44 – 05:08शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:0906:13दिन
शुक्र06:1307:17दिन
बुध07:1708:21दिन
चंद्र08:2109:25दिन
शनि09:2510:29दिन
गुरु10:2911:33दिन
मंगल11:3312:37दिन
सूर्य12:3713:41दिन
शुक्र13:4114:45दिन
बुध14:4515:49दिन
चंद्र15:4916:53दिन
शनि16:5317:57दिन
गुरु17:5718:53रात
मंगल18:5319:49रात
सूर्य19:4920:45रात
शुक्र20:4521:41रात
बुध21:4122:37रात
चंद्र22:3723:33रात
शनि23:3300:28रात
गुरु00:2801:24रात
मंगल01:2402:20रात
सूर्य02:2003:16रात
शुक्र03:1604:12रात
बुध04:1205:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 अप्रैल 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 अप्रैल 2027चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
24 अप्रैल 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 अप्रैल 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 मई 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 मई 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 मई 2027वैशाख अमावस्याअमावस्या
9 मई 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मई 2027वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2383° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।