22 अगस्त 2027 को दोहा का पंचांग

रविवार, 22 अगस्त 2027, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

रविवार, 22 अगस्त 2027 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (18:16 तक), नक्षत्र रेवती (08:41 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 05:10 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 16:26 से 18:03 तक है।

दिन और रात
दिन 05:10 – 18:03
रात 05:10 तक
तिथि
पंचमी, 18:16 तक
षष्ठी
नक्षत्र
रेवती, 08:41 तक
अश्विनी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अगस्त 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 18:16 तक
कृष्ण षष्ठी 18:23, 23 अग॰ तक
नक्षत्र
रेवती 08:41 तक
अश्विनी 09:41, 23 अग॰ तक
योग
गंडअशुभ 23:49 तक
वृद्धि 22:48, 23 अग॰ तक
करण
कौलव 05:59 तक
तैतिल 18:16 तक
गर 06:24, 23 अग॰ तक
चंद्र राशि
मीन 08:41 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:10
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
20:45
चंद्रास्त
09:23
दिनमान
12h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:41 – 04:25
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 12:02

अशुभ समय

राहुकाल
16:26 – 18:03
यमगंड
11:36 – 13:13
गुलिक काल
14:49 – 16:26

22 अगस्त 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:10 – 06:46टालें
चर06:46 – 08:23सामान्य
लाभ08:23 – 10:00शुभ
अमृत10:00 – 11:36शुभ
काल11:36 – 13:13टालें
शुभ13:13 – 14:49शुभ
रोग14:49 – 16:26टालें
उद्वेग16:26 – 18:03टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:03 – 19:26शुभ
अमृत19:26 – 20:49शुभ
चर20:49 – 22:13सामान्य
रोग22:13 – 23:36टालें
काल23:36 – 01:00टालें
लाभ01:00 – 02:23शुभ
उद्वेग02:23 – 03:47टालें
शुभ03:47 – 05:10शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:1006:14दिन
शुक्र06:1407:19दिन
बुध07:1908:23दिन
चंद्र08:2309:27दिन
शनि09:2710:32दिन
गुरु10:3211:36दिन
मंगल11:3612:41दिन
सूर्य12:4113:45दिन
शुक्र13:4514:49दिन
बुध14:4915:54दिन
चंद्र15:5416:58दिन
शनि16:5818:03दिन
गुरु18:0318:58रात
मंगल18:5819:54रात
सूर्य19:5420:49रात
शुक्र20:4921:45रात
बुध21:4522:41रात
चंद्र22:4123:36रात
शनि23:3600:32रात
गुरु00:3201:28रात
मंगल01:2802:23रात
सूर्य02:2303:19रात
शुक्र03:1904:15रात
बुध04:1505:10रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 अग॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 अग॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
29 अग॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 अग॰ 2027भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
4 सित॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 सित॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 सित॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2027कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2431° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।