15 सितंबर 2027 को दोहा का पंचांग

बुधवार, 15 सितंबर 2027, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

बुधवार, 15 सितंबर 2027 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (02:03, 16 सित॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (09:03 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:19 पर और सूर्यास्त 17:38 पर है। राहुकाल 11:29 से 13:01 तक है।

दिन और रात
दिन 05:19 – 17:38
रात 05:20 तक
तिथि
पूर्णिमा, 02:03 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
शतभिषा, 09:03 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 सितंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
पूर्णिमा 02:03, 16 सित॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 03:22, 17 सित॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 09:03 तक
पूर्वा भाद्रपद 11:14, 16 सित॰ तक
योग
धृति 06:42 तक
शूलअशुभ 07:00, 16 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:14 तक
बव 02:03, 16 सित॰ तक
बालव 14:46, 16 सित॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 04:43, 16 सित॰ तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:19
सूर्यास्त
17:38
चंद्रोदय
17:12
चंद्रास्त
04:39
दिनमान
12h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:46 – 04:32
अभिजीत मुहूर्त
11:04 – 11:53 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:29 – 13:01
यमगंड
06:52 – 08:24
गुलिक काल
09:56 – 11:29

15 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:19 – 06:52शुभ
अमृत06:52 – 08:24शुभ
काल08:24 – 09:56टालें
शुभ09:56 – 11:29शुभ
रोग11:29 – 13:01टालें
उद्वेग13:01 – 14:33टालें
चर14:33 – 16:06सामान्य
लाभ16:06 – 17:38शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:38 – 19:06टालें
शुभ19:06 – 20:33शुभ
अमृत20:33 – 22:01शुभ
चर22:01 – 23:29सामान्य
रोग23:29 – 00:56टालें
काल00:56 – 02:24टालें
लाभ02:24 – 03:52शुभ
उद्वेग03:52 – 05:20टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1906:21दिन
चंद्र06:2107:22दिन
शनि07:2208:24दिन
गुरु08:2409:25दिन
मंगल09:2510:27दिन
सूर्य10:2711:29दिन
शुक्र11:2912:30दिन
बुध12:3013:32दिन
चंद्र13:3214:33दिन
शनि14:3315:35दिन
गुरु15:3516:36दिन
मंगल16:3617:38दिन
सूर्य17:3818:36रात
शुक्र18:3619:35रात
बुध19:3520:33रात
चंद्र20:3321:32रात
शनि21:3222:30रात
गुरु22:3023:29रात
मंगल23:2900:27रात
सूर्य00:2701:26रात
शुक्र01:2602:24रात
बुध02:2403:23रात
चंद्र03:2304:21रात
शनि04:2105:20रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2027कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2441° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।