19 सितंबर 2027 को दोहा का पंचांग

रविवार, 19 सितंबर 2027, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

रविवार, 19 सितंबर 2027 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (04:39, 20 सित॰ तक), नक्षत्र अश्विनी (15:11 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:21 पर और सूर्यास्त 17:34 पर है। राहुकाल 16:02 से 17:34 तक है।

दिन और रात
दिन 05:21 – 17:34
रात 05:21 तक
तिथि
चतुर्थी, 04:39 तक
नक्षत्र
अश्विनी, 15:11 तक
भरणी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 सितंबर 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 04:39, 20 सित॰ तक
कृष्ण पंचमी 04:13, 21 सित॰ तक
नक्षत्र
भरणी 15:39, 20 सित॰ तक
योग
ध्रुव 05:49 तक
व्याघातअशुभ 04:44, 20 सित॰ तक
हर्षण 03:19, 21 सित॰ तक
करण
बव 16:42 तक
बालव 04:39, 20 सित॰ तक
कौलव 16:29, 20 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:21
सूर्यास्त
17:34
चंद्रोदय
19:25
चंद्रास्त
08:15
दिनमान
12h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:47 – 04:34
अभिजीत मुहूर्त
11:03 – 11:52

अशुभ समय

राहुकाल
16:02 – 17:34
यमगंड
11:27 – 12:59
गुलिक काल
14:30 – 16:02

19 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:21 – 06:52टालें
चर06:52 – 08:24सामान्य
लाभ08:24 – 09:55शुभ
अमृत09:55 – 11:27शुभ
काल11:27 – 12:59टालें
शुभ12:59 – 14:30शुभ
रोग14:30 – 16:02टालें
उद्वेग16:02 – 17:34टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:34 – 19:02शुभ
अमृत19:02 – 20:30शुभ
चर20:30 – 21:59सामान्य
रोग21:59 – 23:27टालें
काल23:27 – 00:56टालें
लाभ00:56 – 02:24शुभ
उद्वेग02:24 – 03:53टालें
शुभ03:53 – 05:21शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:2106:22दिन
शुक्र06:2207:23दिन
बुध07:2308:24दिन
चंद्र08:2409:25दिन
शनि09:2510:26दिन
गुरु10:2611:27दिन
मंगल11:2712:28दिन
सूर्य12:2813:29दिन
शुक्र13:2914:30दिन
बुध14:3015:31दिन
चंद्र15:3116:32दिन
शनि16:3217:34दिन
गुरु17:3418:32रात
मंगल18:3219:31रात
सूर्य19:3120:30रात
शुक्र20:3021:29रात
बुध21:2922:28रात
चंद्र22:2823:27रात
शनि23:2700:26रात
गुरु00:2601:25रात
मंगल01:2502:24रात
सूर्य02:2403:23रात
शुक्र03:2304:22रात
बुध04:2205:21रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2442° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।